बालोद। लाल, काला , सफेद चावल की खेती के बाद अब जिले में हरे चावल की भी जैविक खेती की जा रही है। बालोद हरे चावल खेती करने वाला प्रदेश का तीसरा जिला बन गया है। इससे पहले धमतरी और दुर्ग जिले में भी इसकी खेती हो चुकी है। यहां भूरे, सफेद, लाल व काले गेहूं की खेती के साथ हरे रंग के गेंहू की खेती की गई। जैविक खेती से उत्पादित रंगीन व सुगंधित चावल और गेहूं की मांग देश की राजधानी दिल्ली से लेकर विदेश ऑस्ट्रेलिया तक है। हाल ही में कृषि विज्ञान रायपुर की टीम ने भी हरे चावल की खेती का निरीक्षण किया था।

दोनों किसानों ने बताया कि आने वाला समय जैविक कृषि का है। वर्तमान में रासायनिक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ का सेवन कर लोग बीमार हो रहे हैं।

इसलिए ऐसे में लोग जैविक खाद्य पदार्थों की मांग कर रहे है। यह तय है कि आने वाले दिनों में जैविक उत्पाद की मांग बढ़ेगी। किसान ध्रुव और कोमल 5 साल से जैविक ब्लैक और रेड राइस की खेती कर रहे है। अब ट्रायल के तौर पर बाहर से हरे चावल का बीज मंगाकर 15 डिसमिल में खेती की है। फसल में बीज निकल आए हैं। 10 से 15 दिनों में इसकी कटाई व मिंजाई भी शुरू की जाएगी। किसान ध्रुव ने बताया कि पहली बार खेती की है। इसे बेचेंगे नहीं बल्कि बीज के लिए रखेंगें, हर सीजन में इसकी खेती करेंगे।

राज्योत्सव में जैविक कृषि से उत्पादित रंग-बिरंगे चावल और गेहूं का स्टाल लगाया गया

राज्योत्सव में सनौद के दो प्रगतिशील किसान ध्रुव राम , कोमल राम ने जैविक कृषि से उत्पादित रंग-बिरंगे चावल व गेहूं का स्टाल लगाया तो सभी हैरान रह गए। किसी ने सोचा और देखा भी नहीं था कि लाल व काले रंग का गेहूं होता है।

जिले में उत्पादित जैविक चावल और गेहूं से विदेश में दवाई बन रही है। लगातार मांग से जैविक कृषि के प्रति किसानों का रुझान भी बढ़ रहा है। जैविक चावल की कीमत 7 से 8 हजार प्रति क्विंटल तक भी बिक्री हो रही है।

किसानों ने बताया कि पहली बार जैविक कृषि की तो फसल उत्पादन के बाद रायपुर बिलासपुर की कम्पनी को बेच देते थे। जिसे कम्पनी अपना सिंबाल लगाकर बाहर बेचती थी। अब खुद का सर्वोदय कृषक प्रोडक्शन लिमिटेड सिंबाल बनाया। कम्पनी के लोग सीधे घर से जैविक रेड और ब्लैक राइस के साथ काला गेहूं खरीद कर ले जाते हैं। आस्ट्रेलिया में इस चावल से दवाई बनाई जाती है।