प्रदेश से देश के 17 राज्यों तक पहुंच रहा ओडिशा का गांजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में गांजा तस्करों के द्वारा एक धार्मिक जुलूस में गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो टूक कहा कि प्रदेश में नशे के कारोबार को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में हुक्का बार पूरी तरह प्रतिबंधित हों। दूसरे राज्यों से आ रहे नशीले पदार्थ और गांजे की एक पत्ती भी दूसरे राज्य से छत्तीसगढ़ में नहीं घुसने देना चाहिए। छत्तीसगढ़ ने ओडिशा से इसे रोकने के लिए मदद मांगी है। अब राज्य की ओडि़शा से लगने वाली सीमा पर तीसरी आंख सीसीटीवी कैमरा के माध्यम से निगरानी का प्लान भी तैयार किया जा रहा है।

साल 2020 के बाद गांजा तस्करी के बहुत ज्यादा मामले एकाएक सामने आने लगे। ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए पूरे देश में गांजा तस्करी की जा रही है। प्रदेश में मलकानगिरी की पहाड़ी, यह क्षेत्र ओडिशा में आता है। इस पहाड़ी से छत्तीसगढ़, ओडिशा व आंध्रप्रदेश की सीमा जुड़ी हुई है। गांजे का कारोबार यहीं से होता आ रहा है। ओडिशा और आंध्रप्रदेश से हर साल लगभग 800 करोड़ कीमत का गांजा देश के 17 से अधिक राज्यों में पहुंचता है। गांजा सप्लाई का मुख्य रास्ता छत्तीसगढ़ के बस्तर, महासमुंद और रायगढ़ से होकर गुजरता है। इन्हीं तीन जिलों के अलग-अलग रास्तों से तस्कर गांजे की खेप अलग-अलग राज्यों में लेकर जाते हैं। तस्करों से माल खरीदने के एवज में 1700 रुपए किलो गांजा का दाम तय है। यही गांजा शहरों तक पहुंचकर तकरीबन 6 हजार रुपए किलो हो जाता है। 1700 रुपए में परिवहन का खर्चा शामिल नहीं है। इसमें नक्सलियों और पुलिस का हिस्सा शामिल है।

इन राज्यों में ज्यादा सप्लाई

सबसे ज्यादा गांजा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दमन-दीव, हिमाचल प्रदेश, आंधप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर में भेजा जाता है। करोड़ों रुपए के इस नशे के कारोबार में कोई एक व्यक्ति या गैंग नहीं, बल्कि ओडिशा और आंध्र के कई गांव के गांव शामिल हैं। गांजे की खेती से लेकर देशभर के अलग-अलग राज्यों के तस्करों तक गांजा पहुंचाने के लिए यहां के लोग बाहर नहीं जाते हैं, बल्कि गांव में ही रहकर पूरे काम को संचालित करते हैं। बाकी राज्यों से तस्कर इन लोगों से संपर्क करते हैं और फिर खेप लेने के लिए खुद या किसी बिचौलिए को लेकर पहुंचते हैं।

तस्करों में ओडिशा के गांजे की सर्वाधिक मांग

गांजे की खेती गांजा ऊपर पहाडिय़ों पर होता है। ओडिशा के कंधमाल, कालाहांडी, गंजाम, भवानीपटना, मुन्नीमुड़ा, नवरंगपुर, कोरापुट जिले के व्यापारीगुड़ा, आंध्र-ओडिशा बॉर्डर और आंध्र ओडि़शा बार्डर और मलकानगिरी में होती है। इसके बाद बढ़ती मांग को देखते हुए अब ओडिशा के ही नवरंगपुर जिले में इसकी खेती की शुरूआत हुई है। इसके साथ ही कंधमाल, कालाहांडी, गंजाम, भवानीपट्नम, मुन्नीमुड़ा, में भी खेती शुरू हो गई। गांजे में मोल्टी के साथ सामिली, तामिली, चिंगलपोली, पिरामल जैसी वैरायटी उगाई जाती है।

हर साल 600 करोड़ का कारोबार

ओडिशा के इन इलाकों से ही हर साल 600 करोड़ रुपए से अधिक का गांजा देशभर में जा रहा है। एक बोरी में 20 किलो गांजा भरा जाता है। इसे नीचे लाने के लिए एक युवक को 4 हजार रुपए दिए जाते हैं। पहाड़ी से नीचे आने के लिए करीब 25 किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। एक बार में 15 से 20 युवकों की टोली निकलती है। ये सारा काम रात के अंधेरे में होता है।

नशे के लिए देश में गांजा दूसरे नंबर की पसंद

इधर, नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट (एनडीटीटी) एम्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में जितनी आबादी नशा करती है उनमें नशे के लिए उपयोग में लाये जाने वाले नशीले पदार्थ में शराब नंबर वन पर है तो गांजा दूसरे नंबर पर है। एनडीटीटी की मानें तो देश की करीब 20 प्रतिशत आबादी अलग-अलग प्रकार का नशा करती है।