छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिले हैं। केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों की अधिसूचना जारी कर दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई। नए न्यायाधीशों में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार शामिल हैं।

इन नियुक्तियों के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ गई है। पहले यहां 11 न्यायाधीश कार्यरत थे। अब यह संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इससे न्यायिक कार्यों के संचालन में मदद मिलने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को तीनों अधिकारियों के नामों की अनुशंसा की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। वहीं, केंद्र सरकार ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी।

सुषमा सावंत ने संभाली कई अहम जिम्मेदारियां

सुषमा सावंत का न्यायिक सेवा में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने महासमुंद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम किया। इसके अलावा बिलासपुर और राजनांदगांव में भी सेवाएं दीं।

वह छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की निदेशक रह चुकी हैं। उन्होंने बिलासपुर कुटुंब न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी भी संभाली। साथ ही विधि एवं विधायी कार्य विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में काम किया।

वर्तमान में वह इसी विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनका न्यायिक और प्रशासनिक अनुभव नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण रहेगा।

सुधीर कुमार का प्रशासनिक अनुभव अहम

सुधीर कुमार ने प्रदेश के कई जिलों में न्यायिक पदों पर सेवाएं दी हैं। वह रायपुर में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने विशेष न्यायालय में भी जिम्मेदारी संभाली है।

इसके अलावा बिलासपुर, जशपुर, कोरबा और महासमुंद में काम किया। उन्होंने दंतेवाड़ा, धमतरी और दुर्ग में भी न्यायिक सेवाएं दी हैं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए उपयोगी होगा अनुभव

सुधीर कुमार को विजिलेंस और अनुशासन से जुड़े मामलों का अनुभव है। उन्होंने न्यायिक प्रशासन से संबंधित कार्य भी किए हैं। इसके अलावा न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण से जुड़े दायित्व निभाए हैं।

उन्होंने हाईकोर्ट प्रशासन और लोक सेवा आयोग को कानूनी सलाह देने का अनुभव भी हासिल किया है। इसलिए उनकी प्रशासनिक समझ नई भूमिका में उपयोगी हो सकती है।

संतोष शर्मा का 16 साल से अधिक अनुभव

संतोष शर्मा मध्य प्रदेश के सीहोर से हैं। उन्होंने 19 मार्च 2009 को उच्च न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। वर्तमान में वह कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं।

उन्होंने कई जिलों में अलग-अलग न्यायिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। इनमें बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर और दंतेवाड़ा शामिल हैं। उन्होंने बलौदाबाजार, रायपुर और सूरजपुर में भी सेवाएं दी हैं।

संतोष शर्मा बिलासपुर हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार विजिलेंस रह चुके हैं। उन्होंने अंबिकापुर में एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया।

लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी की उम्मीद

तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक क्षमता बढ़ेगी। इसका असर लंबित मामलों की सुनवाई पर भी पड़ सकता है। अधिक न्यायाधीश होने से मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

इसके अलावा तीनों अधिकारियों का अनुभव न्यायिक प्रशासन को मजबूत कर सकता है। वहीं, अलग-अलग जिलों में काम करने का अनुभव भी उपयोगी रहेगा।

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