आज छत्तीसगढ़ 21 साल का हो गया है। आज ही के दिन 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया था। साल 2000 में जुलाई में लोकसभा और अगस्त में राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगी और अपने मातृ राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नया प्रदेश बना।
छत्तीसगढ़ क्षेत्रफल के हिसाब से देश का 9वां बड़ा राज्य है। जनसंख्या की बता करें तो छत्तीसगढ़ 17वें नंबर पर है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 28 जिले हैं।
हमारा छत्तीसगढ़ और यहां की राजनीति
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय कांग्रेस से अजीत जोगी पहले मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2003 में जब राज्य में पहली बार चुनाव हुआ तब कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी के रमन सिंह प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। रमन सिंह ने लगातार तीन बार प्रदेश की कमान संभाली। लेकिन 2018 में कांग्रेस के पक्ष में चली आंधी ने बीजेपी का सुपड़ा साफ कर दिया और 65+ सीट जीतने का दावा करने वाली बीजेपी 15 सींटो में सिमटकर रह गई। जिसके बाद भूपेश बघेल प्रदेश के मुखिया बने। छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। वहीं अगर लोकसभा की बात करें तो राज्य में 11 सीटें हैं। वर्तमान में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। वर्तमान में राज्य की 90 में से 70 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है।
हमारी संस्कृति, हमारी परंपराएं
छत्तीसगढ़ की संस्कृति यहां की लोकसंस्कृति और जनजातीय संस्कृति में स्पष्ट झलकती है। यहां के लोकनृत्य और जनजातीय नृत्य पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। राज्य सरकार भी अब यहां की गौरवशाली और अद्भुत संस्ककृति को बढ़ावा देने की ओर अग्रसर है। छत्तीसगढ़ के लोकगीतों में पंडवानी, भरथरी, चंदैनी, ददरिया, प्रमुख हैं, वहीं लोकनृत्यों में सुआ, राउत नाचा, करमा और गौर नृत्य प्रमुख है।
हमारी प्रकृति, हमारी पहचान
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश है। यहां के वनवासी यहां की प्रकृति में बसते हैं और यहां की प्रकृति वनवासियों में। छत्तीसगढ़ में तीन राष्ट्रीय उद्यान है। जिसमें गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान शामिल है। इसके अलावा यहां अभ्यारण्य और टाईगर रिजर्व भी है।
पर्यटकों का आकर्षण, हमारे पर्यटन स्थल
दूसरे राज्यों में या देश के सामने छत्तीसगढ़ की तस्वीर नक्सलगढ़ की रही है। लेकिन तब का हमारा छत्तीसगढ़ आज बदल गया है। आज का युवा छत्तीसगढ़ अब नक्सलियों या माओवादियों से नहीं जाना जाता। बल्कि यहां के पर्यटन स्थल यहां की पहचान बन रहे हैं। यहां बस्तर का चित्रकोट है, रायपुर का जंगल सफारी, पुरखौती मुक्तांगन है, कवर्धा का भोरमदेव मंदिर है। तीर्थस्थल के रूप में डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी का दरबार है, राजिम का राजीव लोचन मंदिर है, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी का धाम भी दर्शनीय है। इसके अलावा यहां कई नदियां भी हैं। जिसमें शिवनाथ, महानदी, अरपा, पैरी, सोंढूर, खारून, हसदेव, इंद्रावती प्रमुख है।
हमारी अर्थव्यवस्था, हमारी मजबूती
अर्थव्यवस्था की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अब काफी मजबूज हो गया है। यहां के उद्योग और छोटे-छोटे संस्थान सब मिलकर एक सशक्त और मजबूत छत्तीसगढ़ बना रहे हैं। यही वजह है कि कोरोना जैसी महामारी के दौर में भी जहां देश भर में मंदी छाई रही वहीं छत्तीसगढ़ में इसका असर न के बराबर रहा। बेशक, साल 2000 का छत्तीसगढ़ आज हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयां छू रहा है। हमारा युवा छत्तीसगढ़ अब अपने सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
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