अब तक के कार्यकाल में सिर्फ जुमलों और झूठ का बोलबाला
रायपुर। मोदी सरकार को सात साल से अधिक हो गए है। एक कार्यकाल पूरा और पौने तीन साल दूसरे कार्यकाल का पूरा होने के बाद लगभग सात वर्षों में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में जो कार्य किए वो जनता को गहरी पीड़ा में डालने वाले रहे हैं। जो वादे प्रधानमंत्री बनने से पहले किए गए आज सरकार बिल्कुल उसके विपरीत जाती हुई दिख रही है। चाहे वह मंहगाई की मार हो, नारीशक्ति पर अत्याचार हो या फिर भ्रष्टाचार हो। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ कहने वाली भारतीय जनता पार्टी आज नरेंद्र मोदी के किसी भी वादे पर बात करने को तैयार नहीं है।
जनता इन सात सालों को भारत देश के काले अध्याय के रूप में देख है। बचे तीन वर्षों में नरेंद्र मोदी के पास देश की भलाई के लिए न कोई कार्ययोजना है और न उनकी मंशा ही इस देश की भलाई की है। वे बस अपनी छवि को लेकर चिंतित नजऱ आते हैं और इसके लिए किसी भी हद तक जाने में नहीं हिचकते। वे एक गंभीर प्रधानमंत्री की जगह एक मसखरे अधिक दिखाई देने लगे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के लिए अब तक जो उपमाएं दी हैं वह सटीक साबित हुई हैं। चाहे वह ‘सूट बूट की सरकार’, हो, ‘चौकीदार चोर है’ हो, ‘हम दो हमारे दो’ हो या फिर ‘नौटंकी’ हो।
कोई भी वादा पूरा नहीं किया
प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने जो बड़े वादे किए थे उनमें से एक भी पूरे नहीं हुए. चाहे वह ‘अच्छे दिन’ की बात हो, कालाधन वापस लाकर ‘सभी के खातों में 15-15 लाख’ देने की बात हो या फिर हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात हो। वर्ष 2019 का जो संकल्प पत्र पेश करते हुए नरेंद्र मोदी दावा करते हैं कि ‘सबका साथ सबका विकास का मंत्र भारत के कोने कोने तक गूंजा है’ लेकिन सच यह है कि इन्हीं नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में धर्म और संप्रदाय के नाम पर समाज को टुकड़ों टुकड़ों में बांट दिया गया। संकल्प पत्र में समावेशी विकास की बात की है लेकिन जनता गवाह है कि विकास सिर्फ़ भाजपा का, उसके नेताओं का और देश के चुनिंदा उद्योगपति और कारोबारियों का ही हुआ है।
अर्थव्यवस्था हुई बर्बाद
2014 से 2019 तक के कार्यकाल के ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले कार्यों में ‘नोटबंदी’, ‘जीएसटी’ और ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का जि़क्र आया था। देश का हर नागरिक जानता है कि नोटबंदी और जीएसटी ने देश की अर्थव्यवस्था का कैसा बंठाधार किया है। जिस सर्जिकल स्ट्राइक की वे वाहवाही लूटना चाहते हैं वह देश मनमोहन सिंह के नेतृत्व में न जाने कितनी बार ख़ामोशी से कर चुका था। देश के गृहमंत्री आज तक यह नहीं बता पाए हैं कि जिस पुलवामा हमले के बाद उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक की थी, वह पुलवामा का हमला किसने और कैसे किया? किसने षडयंत्र रचा?
राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को खत्म करने केंद्रीय एजेंसी का दुरूपयोग
भाजपा नेता लोकतंत्र की मज़बूती की बात करते हैं लेकिन सच यह है कि दोनों के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही लोकतंत्र ख़त्म हुआ है। पार्टी दो लोगों की पार्टी रह गई है और किसी को न कुछ बोलने की अनुमति है और न असहमति जताने की। लोकतंत्र की मज़बूती की बात करने वाले दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग से लेकर अदालतों तक हर लोकतांत्रिक संस्थाओं को ख़त्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उल्टे उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को ख़त्म करने के लिए आईटी, सीबीआई से लेकर ईडी तक हर एजेंसी का जमकर दुरुपयोग किया है। राज्य सरकारों को पैसों और सत्ता की ताकत से जिस बेशर्मी के साथ गिराया गया ,लोकतंत्र को जिस तरह रौंदा गया उसने आरएसएस की छत्र छाया और मोदी और शाह के नेतृत्व में भाजपा के तानाशाह चेहरे को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया।
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