पहली तिमाही में 2.78 लाख क्विंटल वनोपजों का संग्रहण
छत्तीसगढ़ में लगभग 88 प्रतिशत वनोपजों की खरीद
छत्तीसगढ़ देशभर में लघु वनोपज के संग्रहण में सबसे आगे है। ‘द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (ट्राइफेड) की ओर से जारी किए गए आंकड़ो के मुताबिक अप्रैल से जुलाई 2021 के बीच प्रदेश में 80 करोड़ 12 लाख रुपये से 2 लाख 77 हजार 958 क्विंटल वनोपजों की खरीदी की गई है। वहीं इस अवधि में 93 करोड़ रुपये मूल्य के कुल संग्रहित लघु वनोपजों में 88.36 फीसदी वनोपज का संग्रहण छत्तीसगढ़ में हुआ है।
इनमें 40 करोड़ 90 लाख रुपये की 1 लाख 13614 क्विंटल इमली (बीज सहित) 27 करोड़ 59 लाख रुपये का 1 लाख 37946 क्विंटल साल बीज, 4 करोड़ 15 लाख रुपये की 6595 क्विंटल फूल इमली, 2 करोड़ 92 लाख रुपये का 2390 क्विंटल चिरौंजी गुठली के और 1 करोड़ 78 लाख रुपये का 10493 क्विंटल बहेड़ा का संग्रहण किया गया है।
जीवनस्तर में सुधार
एक समय में छत्तीसगढ़ में पहले महज 7 वनोपजों की खरीदी की जाती थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे बढ़ाकर 52 पहुंचा दिया। सरकार ने केवल वनोपजों की संख्या ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि इससे ग्रामीणों की आजीविका भी बढ़ी है और उनका जीवनस्तर भी उपर उठा है। सरकार के इस फैसलों ने औने-पौने दाम में बिकने वाले लघु वनोपज को अब कीमती बना दिया है। इसका सीधा लाभ यहां के वनोपज संग्राहकों को मिल है। भूपेश सरकार की दूरगामी सोच किसानों और गरीबों के उत्थान का काम कर रही है। इससे लोगों को तो फायदा मिल ही रहा है, साथ ही वनोपज संग्रहण के मामले में छत्तीसगढ़ नया अध्याय लिख रहा है।
बस्तर में लगेगा वनोपज आधारित उद्योग
वर्तमान में राज्य में संग्रहित वनोपज ही केवल पांच फीसद हिस्से का ही प्रसंस्करण राज्य में होता है। इस स्थिति को बदलने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वनांचल परियोजना प्रारंभ की है, बस्तर जैसे क्षेत्र में वनोपज आधारित उद्योग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इस योजना से उत्साहित होकर बस्तर क्षेत्र में 15 उद्यमियों ने लघु वनोपज आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए अपनी सहमति दी है।
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