छत्तीसगढ़ में सरेंडर कर चुके नक्सली अब नक्सल पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर डैनेक्स टैक्सटाइल प्रिंटिंग फैक्ट्री चलाएंगे। यहां ये सब मिलकर ब्रांडेड कपड़ा कंपनियों के लिए कपड़ों पर प्रिंटिंग का काम करेंगे। यहां से प्रिंट और सिलाई किए हुए कपड़ों को विभिन्न माध्यमों से देशभर के बाजार में भेजा जाएंगा। ये फैक्ट्री दंतेवाड़ा के कारली इलाके में बन रही है।

सरेंडर कर चुके 100 नक्सलियों को रोजगार

यह छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी फैक्ट्री होगी, जिसका जिम्मा नक्सल पीड़ित परिवारों और सरेंडर नक्सलियों के हाथों में होगा। यहां सरेंडर कर चुके 100 नक्सलियों को रोजगार मिलेगा। दंतेवाड़ा के कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा कॉलोनी में डैनेक्स टैक्सटाइल प्रिंटिंग की पहली फैक्ट्री खुलेगी।

जिले में यह चौथी फैक्ट्री

यहां नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ सरेंडर नक्सलियों को भी आवासीय व्यवस्था के साथ रोजगार मिलेगा। डैनेक्स की यह चौथी फैक्ट्री होगी। 3 फैक्ट्रियों में कपड़ों की सिलाई का काम हो रहा है। कारली में मशीनें लगवाने का काम एक-दो दिनों में शुरू हो जाएगा।

गारमेंट हब बनेगा दंतेवाड़ा

1 नवंबर से यहां ट्रेनिंग के साथ रोजगार देने की शुरुआत हो जाएगी। यहां 20 शॉपिंग कॉम्पलेक्स के साथ टैक्सटाइल प्रिंटिंग फैक्ट्री भी होगी। जिससे ये सभी बेहतर आजीविका और बेहतर जीवन की ओर अग्रसर हो सकें। बता दें कि दंतेवाड़ा को गारमेंट हब बनाने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।

महिलाओं को मिला रोजगार

गारमेंट की 3 फैक्ट्री खुलने से यहां करीब 800 महिलाओं को रोजगार मिल गया है। दंतेवाड़ा पुलिस ने जून 2020 को लोन वर्राटू अभियान शुरू किया था। जिसके बाद से करीब 445 से ज्यादा नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। अब उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। कलेक्टर के मुताबिक, सरेंडर कर चुके जिन नक्सलियों को रोजगार दिया जाएगा, उनकी लिस्ट बन रही है।

  • अब तक खुल चुकी 3 फैक्ट्री
  • 31 जनवरी 2021 को हारम में पहली फैक्ट्री खुली। यहां 500 महिलाएं काम कर अपनी आजीविका सशक्त कर रही हैं।
  • जून 2021 को बारसूर में दूसरी फैक्ट्री खुली। यहां 150 महिलाओं को रोजगार मिला।
  • गारमेंट की तीसरी फैक्ट्री सबसे पिछड़े ब्लॉक कटेकल्याण में है। जहां 150 महिलाओं को अच्छी खासी आमदनी हो रही है।