छत्तीसगढ़ में तीन दिवसीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शानदार आगाज हो चुका है। नृत्य और संगीत के इस संगम में देश के बड़े-बड़े दिग्गज शामिल हो रहे हैं। उद्घाटन समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बतौर मु्ख्य अतिथि शामिल हुए। इस महोत्सव के लिए विभिन्न राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। प्रदेश के दिग्गज और वरिष्ठ नेतागण भी इस कार्यक्रम में शामिल होकर मंच की शोभा बढ़ा रहे हैं। निश्चित रूप से प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच मंत्रियों, विधायकों और दिग्गजों का एक मंच पर आना किसी के कद को दर्शाता है। जाहिर है वो और कोई नहीं बल्कि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल हैं।
कार्यक्रम के लिए कई बड़े-बड़े नेताओं को आमंत्रण दिया गया है। कुछ आए तो कुछ किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए। इसी तरह राहुल गांधी भी व्यस्तता के चलते इस बार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। लेकिन उनका पत्र ये बताने के लिए काफी है क छत्तीसगढ़ की राजनीति में दाऊ की पकड़ कितनी मजबूत है। मतलब ये कहा जा सकता है कि इस आयोजन के बहाने सीएम भूपेश बघेल अपनी साख बनाने में कामयाब रहे हैं।
आयोजन से दूर हैं बाबा
हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब भूपेश ने पार्टी में अपनी पकड़ को मजबूत किया हो। सभी विधायकों और नेताओं को एक साथ लाने का काम तो भूपेश पहले से ही शुरू कर चुके हैं। उदाहरण के तौर पर हम विधायकों को दी गई जिम्मेदारी को ले सकते हैं, जिन्होंने विभिन्न राज्यों में जाकर अतिथियों को इस आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया। विधायकों और संसदीय सचिवों को जिम्मेदारी देकर भूपेश बघेल ने ना सिर्फ उन्हें सम्मान दिया, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की अपनी स्वच्छ छवि बनाने में भी कामयाब हुए। इस आयोजन में पूरी कांग्रेस पार्टी एक मंच पर दिखी। ये बात अलग है कि कुर्सी की चाहत में दिल्ली के चक्कर काट रहे बाबा इस आयोजन से दूर हैं।
आदिवासी संस्कृति को दिया मंच
आदिवासी महोत्सव के मंच पर सीएम बघेल एक सधे हुए नेता के रूप में नजर आए। उनकी सोच हो या उनका अंदाज, सीएम हर तरफ से खुद को एक कद्दावर नेता बताने में आगे रहे हैं। नृत्य महोत्सव के शुरुआत में ही हम सीएम भूपेश को अलग अंदाज में देख चुके हैं। जब वे एक न्यूज एंकर की भूमिका में नजर आए। इस आयोजन से वे खुद की दमदार उपस्थिति तो दर्शा ही रहे हैं, साथ ही आदिवासि संस्कृति को भी विश्व पटल पर रखने का काम कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर जो नेता बघेल को चुनौती दे रहे हैं, उनकी सरगुजा में दखल है। लेकिन नृत्य महोत्सव के मंच पर सरगुजा के विधायकों की मौजूदगी कहीं न कहीं सरगुजा महाराजा के लिए चुनौती खड़ी कर रही है।
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