मोदी राज में कमाई से ज्यादा भरपाई कर रही जनता

हर माह पांच हजार रुपए टैक्स वसूली

रायपुर। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कुछ करने की जरूरत है, क्योंकि उनके बढ़ते दाम आम आदमी के लिए मुसीबत बन रहे हैं। जहां एक ओर पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में बढोत्तरी हो रही है, तो वहीं खाद्य तेल और सब्जियों के दामों में इजाफा होने से लोगों के घरों का बजट बिगड़ रहा है। इस बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी परेशान है और उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और कैसे अपनी गृहस्थी के बजट को व्यवस्थित करे।

लोगों को कहना है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण लगाने को लेकर कोई ठोस पहल करे। क्योंकि इस महंगाई में घर चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। वैसे देखा जाए तो केंद्र सरकार महंगाई रोक पाने में पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। पेट्रोल डीजल रसोई गैस के दाम आज किस स्तर पर है, यह देखा जा सकता है। वर्ष 2014 में अच्छे दिन आने के नाम पर भाजपा सत्ता पर काबिज हुई थी पर अब वह अच्छे दिन कहां हैं यह देश की जनता सवाल कर रही है।

क्रुड ऑयल की कीमत कम होने के बाद भी बढ़े रेट

अप्रैल 2014 में मनमोहन सरकार में क्रूड ऑयल 108 डॉलर प्रति बैरल था। तब पेट्रोल 71.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 57.28 रुपये प्रति लीटर था। आज अक्टूबर 2021 मोदी सरकार में क्रूड ऑयल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल है। इस समय दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 108.29 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.02 रुपये प्रति लीटर है। मोदी सरकार के 7 सालों में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 12 बार बढ़ाया जा चुका है, जबकि सिर्फ 2 बार घटाया है। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2017 में 2 रुपये और दूसरी बार अक्टूबर 2018 में 2 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटाई गई थी। सरकार ने हर बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है। मई 2020 में पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी। जिससे केंद्र को जाने वाले एक्साइज ड्यूटी 32.98 और डीजल पर 31.83 हो गई। पेट्रोल-डीजल की महंगाई के लिए कुल मिलाकर केंद्र सरकार की तरफ से लगाई जा रही एक्साइज ड्यूटी कटघरे में है। यह भी सच है कि जितनी एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार अब लगा रही है, उतनी कभी किसी कार्यकाल में नहीं लगाई गई थी। यूपीए सरकार में डीजल पर वैट 3 रुपये 56 पैसे थे, जो अब करीब 32 रुपये है।

सरकारें दें आम जनता को राहत

मामले में केंद्र सरकार को भी सक्रिय होना चाहिए और राज्यों को भी। उनके बीच आरोप-प्रत्यारोप का कोई मतलब इसलिए नहीं है, क्योंकि केंद्र हो या राज्य सरकारें, दोनों ही पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से लाभान्वित होती हैं। यदि राज्य सरकारें यह चाह रही हैं कि पेट्रोल-डीजल की मूल्य वृद्धि थामने के लिए केंद्र सरकार कुछ करे तो उन्हें भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उचित यह होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे उपाय करें, जिससे आम जनता को राहत मिले। यह सही है कि केंद्र और राज्यों के समक्ष राजस्व बढ़ाने की चुनौती है, लेकिन इसके लिए अन्य उपाय खोजे जाने चाहिए। पेट्रोलियम पदार्थो पर टैक्स के जरिये राजस्व जुटाने की एक सीमा होनी चाहिए।

हर माह पांच हजार रुपये टैक्स वसूली

सुनने में बड़ा अजीब लगता है, लेकिन यही सच्चाई है आम आदमी से हर माह केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पांच हजार रुपए टैक्स वसूल रही हैं। आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। इसे ऐसे समझें कि एक आदमी के घर का बजट 20 हजार रुपए का रहता है। जब आप बाजार से 20 हजार रुपए की हर माह खरीदारी करते हैं तो जीएसटी देते हैं। जीएसटी के चार स्लैब हैं, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत। अब हम औसत 15 प्रतिशत मानें तो 20 हजार में तीन हजार का टैक्स हुआ। अब आते हैं पेट्रोल पर। आमतौर पर हर व्यक्ति एक दिन में एक लीटर का उपयोग करता है। यह पेट्रोल 105 से 110 रुपए लीटर का है। इस पर केंद्र और राज्य सरकार का मिलाकर 70 रुपए टैक्स लग रहा है तो एक माह में 21 सौ रुपये का टैक्स दे रहे हैं। तो कुल मिलाकर हम लोग से हर माह सरकार पांच हजार रुपए का टैक्स वसूल रही है। इतना टैक्स तो दस लाख कमाने वाले से आयकर में भी नहीं लगता है।

क्या सरकार कीमतें घटा नहीं सकती है?

निश्चित तौर पर सरकार के पास पेट्रोलियम उत्पादों के दाम घटाने के विकल्प हैं। इनमें कीमतों को डीरेगुलेट करने और इन पर टैक्स घटाने के विकल्प शामिल हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकार के पास डायरेक्ट टैक्स बढ़ाने का विकल्प था। महामारी के दौरान भी जिन सेक्टर के लोगों की कमाई बढ़ी या बरकरार रही, उन पर ज्यादा टैक्स सरकार लगा सकती थी। साथ ही सरकार पेट्रोल पर टैक्स को घटा भी सकती है। उनका मानना है कि ये पूरी तरह से सरकार के हाथ में है। आप टैक्स घटाकर ईंधन सस्ता कर सकते हैं और लोगों को राहत दे सकते हैं। लेकिन, सरकार ऐसा करना ही नहीं चाहती है। वे कहते हैं कि एक्साइज और वैट में कटौती की भरपाई सरकारें अपने बेफिजूल के खर्चों को कम करके कर सकती हैं।