रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दोपहर 12 बजे अपने निवास कार्यालय में आयोजित गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण कार्यक्रम में पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 2 करोड़ 92 लाख रूपये की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे। जिसमें 15 नवंबर से 30 नवंबर तक राज्य के गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से गोधन न्याय योजना के तहत क्रय किए गए गोबर के एवज में 2 करोड़ 44 लाख रुपये भुगतान और गौठान समितियों और महिला समूहों को 48 लाख रुपये की लाभांश राशि शामिल है।

बता दें कि गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में ग्रामीणों से 2 रुपये की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। राज्य में इस योजना की शुरूआत 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व से हुई थी। 20 जुलाई 2020 से लेकर 15 नवंबर 2021 तक की स्थिति में 55.77 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। जिसके एवज में गोबर बेचने वालों को 111 करोड़ 56 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। गौठानों में गोबर से महिला स्व-सहायता समूह बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट प्लस और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।

सुपर कंपोस्ट खाद का निर्माण

महिला समूहों द्वारा गौठानों में अब तक 9 लाख 32 हजार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट और 4 लाख 12 हजार क्विंटल से ज्यादा सुपर कंपोस्ट खाद का निर्माण किया जा चुका है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से शासन के विभिन्न विभागों और किसानों को रियायती दर पर प्रदाय किया जा रहा है।

48 करोड़ से ज्यादा की आय

महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-काष्ठ, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां और अन्य सामग्री बनाकर, उसका विक्रय कर मुनाफा कमा रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी और मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 48 करोड़ 20 लाख रुपये की आय हो चुकी हैं।

गोबर से बनेगा पेंट

राज्य में गौठानों से 9321 महिला स्व सहायता समूह सीधे जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या लगभग 67 हजार है। गौठानों से जुड़ने और गोधन न्याय योजना से महिला समूहों में स्वावलंबन के प्रति एक नया आत्म विश्वास जगा है। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत उत्पादन की शुरूआत की जा चुकी है। गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए कुमारप्पा नेशनल पेपर इंस्टिट्यूट जयपुर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के मध्य एमओयू हो चुका है।