सरकार बनने के बाद विशेष पहल से योजना शुरू

आज देश ने चन्द्रयान पर सफलता अर्जित कर लिया है। हम एक ओर ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व कर रहें है। वहीं दूसरी ओर कुपोषण के मामले में भारत का प्रतिशत अन्य देशों की तुलना में अधिक है। छत्तीसगढ़ में कुपोषण एवं एनीमिया को जड़ से समाप्त करने का संकल्प कांग्रेस सरकार ने लिया है। वास्तव में कुपोषण नई पीढ़ियों के बुनियाद पर हमला करता है। कुपोषण हम सबके लिए चिंता का विषय है। आज दुनिया में किसी भी जंग से ज्यादा खतरा कुपोषण से है। छत्तीसगढ़ में कुपोषण बड़ी समस्या है। इसलिए कुपोषण के खिलाफ अभियान आदिवासी क्षेत्र बस्तर से शुरू कर दिया गया है। वहां डीएमएफ की राशि से पंचायतों मे गर्म भोजन की व्यवस्था की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण व एनीमिया को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। ताकी ”स्वस्थ छत्तीसगढ़” के साथ ”गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” की कल्पना को साकार किया जा सके।

छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए 2 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेशव्यापी ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान’ का शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ की कल्पना को साकार रूप देने के लिए अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों, नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों को अभियान से हम विकास के चमकते सितारे के रूप में एक ‘नवा छत्तीसगढ़’ देख पाएंगे।

सीएम ने छेड़ा महाअभियान

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ के पांच वर्ष से कम आयु के 37 प्रतिशत से अधिक बच्चे कुपोषित और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ये आंकड़े न सिर्फ प्रभावित व्यक्ति के परिवारों के लिए बल्कि प्रदेश के समाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी चिंताजनक हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति को एक महाअभियान के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया।

कुपोषण को हराना बड़ी चुनौती

कुपोषण को हराना वर्तमान समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रत्येक शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को कुपोषण और एनीमिया मुक्त कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान’ को एक महायज्ञ के रूप लेकर सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी 3 वर्षों में प्रदेश केा कुपोषण से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के समन्वय से जिला स्तर पर कुपोषण मुक्ति के प्रयास किये जाएंगे। अभियान का क्रियान्वयन, अनुश्रवण, मूल्यांकन और अभिलेख संधारण जिला प्रशासन करेगा। इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, विकासखण्ड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।

पौष्टिक सुपोषित आहार नि:शुल्क

सुपोषण अभियान के लिए वजन त्यौहार में लिये गये आंकड़ों के आधार पर शून्य से 5 आयु वर्ग के कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन किया जाता है। एनीमिया पीड़ित बच्चों और महिलाओं की वास्तविक संख्या की जानकारी के लिए गांवों में ग्राम पंचायतों और शहरों के वार्डों में शिविर लगाया जाता है। ग्रामवार और नामवार चिन्हांकन की प्रक्रिया जैसे-जैसे पूरी होती जाएगी, चिन्हांकित हितग्राहियों को चरणबद्ध रूप से अभियान में शामिल कर लाभान्वित किया जा रहा है। अभियान के तहत कुपोषण प्रभावित बच्चों और महिलाओं को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और आवश्यकतानुसार पौष्टिक आहार नि:शुल्क दिया जाता है। नि:शुल्क काउंसलिंग और परामर्श सेवाएं देने के साथ नियमित मॉनिटरिंग भी जा रही हैँ। प्रभावितों को आयरन पोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली देने की व्यवस्था की जाएगी। जनजागरूकता के लिए सुपोषण रथ, शिविरों और परिचर्चा का आयोजन किया जाता है।

इन प्रयासों से मिल रही सफलता

 प्रदेश में कुपोषण दूर करने के लिए पूरक पोषण आहार, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री अमृत योजना, किशोरी बालिका योजना, पोषण अभियान, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के तहत प्रदेश के 50 हजार से अधिक आंगनबाड़ियों और मिनी आंगनबाड़ियों में शिशुओं, बच्चों को और गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण आहार और रेडी टू ईट की व्यवस्था की गई है। महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती माताओं को गर्म भोजन भी दिया जाता है।