छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दुधारू पशु प्रदाय योजना में किए गए हालिया संशोधन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं पशुपालन क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल के रूप में उभरकर सामने आए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना के दायरे को विस्तारित करते हुए सभी सामाजिक वर्गों के लिए इसे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

पूर्व में यह योजना सीमित वर्गों तक केंद्रित थी, जिससे लाभार्थियों का दायरा सीमित रहा। नवीन निर्णय के अंतर्गत इस प्रतिबंध को समाप्त करते हुए समस्त पात्र हितग्राहियों को योजना में शामिल किया गया है। यह परिवर्तन नीति के समावेशी स्वरूप को सुदृढ़ करता है तथा सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।

योजना के अंतर्गत संचालित पायलट प्रोजेक्ट के विस्तार के साथ-साथ नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ किए गए समझौता ज्ञापन में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। यह संशोधन योजना के क्रियान्वयन तंत्र को अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने में सहायक होगा। इसके माध्यम से डेयरी क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

इसके अतिरिक्त, कैबिनेट द्वारा पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन को सुदृढ़ करने हेतु टीकाद्रव्यों की आपूर्ति प्रणाली में भी सुधार किया गया है। निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा की कमी एवं जेम पोर्टल पर दर उपलब्ध न होने के कारण समय पर आपूर्ति बाधित हो रही थी। इस समस्या के समाधान हेतु एनडीडीबी की सहायक कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड से सीधे क्रय का निर्णय लिया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जनवरी 2027 तक आवश्यक टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से पशुओं में संक्रामक रोगों की रोकथाम, मृत्यु दर में कमी तथा दुग्ध, अंडा एवं मांस उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।

समग्र रूप से यह निर्णय न केवल पशुपालन क्षेत्र को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आय सृजन एवं रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।