रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि संरक्षण के लिए आर्द्रभूमियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वेटलैंड्स प्राकृतिक रूप से जल को संचित और शुद्ध करने का कार्य करते हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच संरक्षण उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
जैव विविधता को मिलता है प्राकृतिक आश्रय
विशेषज्ञों ने बताया कि जल के संरक्षण के साथ-साथ वेटलैंड्स हजारों वनस्पति और जीव प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास भी प्रदान करते हैं। प्रवासी पक्षी, मछलियां और उभयचर जीव इन क्षेत्रों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए इनका संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि पारिस्थितिक आवश्यकता भी है।
आधुनिक तकनीक से होगा बेहतर प्रबंधन
कार्यक्रम में जल संरक्षण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, एआई आधारित निगरानी और आधुनिक डेटा प्रबंधन प्रणालियों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संसाधनों के माध्यम से जल स्रोतों की निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।
पंचायतों और समुदायों को मिलेगी बड़ी भूमिका
बैठक में कहा गया कि संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। इससे लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
दीर्घकालिक रणनीति पर बनी सहमति
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने जल को विकास योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाने पर सहमति जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि संरक्षण गतिविधियों को आजीविका, शिक्षा और सामुदायिक विकास से जोड़कर व्यापक जनसमर्थन हासिल किया जा सकता है।
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