छत्तीसगढ़ सरकार ने पशु और पशुधन दोनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में बने गौठान और गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल दिया है। भूपेश सरकार की इस महत्वकांक्षी गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 116 करोड़ रुपये से ज्यादा की गोबर खरीदी की जा चुकी है। इस गोबर से राज्य के करीब 7800 गौठानों में भारी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट बनाया जा रहा है। गौठानों में अब तक बने और बेचे गए कम्पोस्ट खादों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है। गोधन न्याय योजना के प्रति ग्रामीणों की रुचि और भागीदारी ने इसे न सिर्फ लोकप्रिय बनाया है बल्कि इसके जो परिणाम हमारे सामने आए हैं वो बेहद सुखद हैं।

गोधन न्याय योजना वास्तव में अपने आप में एक ऐसी योजना है, जो बहुआयामी उद्देश्यों को अपने आप में समेटे हुए है। इस योजना के शुरूआती दौर में लोगों के मन में कई तरह के सवाल थे और इसकी सफलता को लेकर आशंकाएं भी थी, जिसे गौठान संचालन समिति और गौठान से जुड़ी महिलाओं ने निर्मूल साबित कर दिया है। इस योजना से रोजगार के नए रास्ते खुले। जैविक खेती को बढ़ावा और पशुपालकों, ग्रामीणों को अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिला। इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को मिला है। इस योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।

वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन

ग्रामीणों की भागीदारी से ही विकास संभव- सीएम

गौठानों में महिला समूहों द्वारा जिस लगन और मेहनत के साथ आयमूलक गतिविधियां संचालित की जा रही है वह निश्चित ही सराहनीय है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि हमारे गांव शक्ति का केन्द्र रहे हैं। ग्रामीण संसाधनों में इतनी शक्ति होती है कि उससे प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था संचालित हो सकती है। हमें अपनी संस्कृति, अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान से जुड़े रहकर विकास की गति को बढ़ाना हो, तो इसका सबसे अच्छा साधन है अपने परम्परागत संसाधनों का संरक्षण और मूल्य संवर्धन करते हुए ऐसा विकास, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी हो।

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माहात्मा गांधी के सपनों का स्वराज

गोधन न्याय योजना और गौठान वास्तव में ग्रामीणों की योजना है और उन्हीं के दम पर ये संचालित है। गौठानों में गोबर बेचने वाले, खरीदने वाले और उससे वर्मी कम्पोस्ट से लेकर विभिन्न उत्पाद तैयार करने वाले सभी ग्रामीण ही हैं। इससे ये स्पष्ट है कि गांव रोजगार और उत्पादन के केन्द्र बन सकते हैं, जो गांधी जी के ग्राम स्वराज का उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ सरकार सुराजी गांव योजना- नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी और गोधन न्याय योजना के जरिए ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की ओर तेजी से बढ़ रही है।

मवेशियों को मिला ठिकाना

मेहनत से कुछ भी किया जा सकता है

सरकारी आंकड़ों की मानें तो गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 116 करोड़ 63 लाख रुपये के गोबर की खरीदी गौठानों में हो चुकी है। इसके लिए गौठान समितियों को 41 करोड़ 96 लाख और महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 27 करोड़ 44 लाख रुपये के लाभांश का वितरण किया जा चुका है। इन सभी गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाती महिलाओं की लगन और मेहनत ने ये बात सिद्ध कर दी है कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी विषम क्यों न हो, उसे अपने पुरूषार्थ से हराया जा सकता है।

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दूसरे राज्यों में यहां के उत्पादों की मांग

गौठानों में महिला समूहों ने उच्च गुणवत्ता के वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट खाद तैयार कर एक नया कीर्तिमान रचा है। नतीजन अब छत्तीसगढ़ के गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की मांग पड़ोसी राज्य भी करने लगे हैं। झारखंड राज्य ने डेढ़ लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट सप्लाई का आर्डर रायगढ़ जिले को दिया है। यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है। छत्तीसगढ़ राज्य से लगे सीमावर्ती राज्यों के किसान भी छत्तीसगढ़ के बार्डर इलाके के गौठानों में आकर वर्मी कम्पोस्ट खरीद रहे हैं।

स्वावलंबन की सीढ़ी चढ़े गौठान

गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में अब तक 10 हजार 584 गौठान स्वीकृत किए गए हैं। जिनमें से 7 हजार 836 गौठान संचालित हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि इस योजना से लाभान्वित होने वालों में 44.82 प्रतिशत महिलाएं हैं। 89 हजार से ज्यादा भूमिहीन परिवारों को इस योजना से अतिरिक्त आय हो रही है। गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। अब गोबर से प्राकृतिक पेंट निर्माण का काम भी शुरू किए जाने की तैयारी है। गौठानों में सफलतापूर्वक गोबर की खरीदी और आयमूलक गतिविधियों के संचालन से 2029 गौठान स्वावलंबन की सीढ़ी चढ़ चुके हैं। यह गोधन न्याय योजना के सार्थकता और उसके जरिए होन वाले लाभ का परिणाम है।