रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में से एक सुराजी गांव योजना के गरुवा घटक के तहत अब तक प्रदेश में बने और सक्रिय रूप से संचालित 7 हजार 777 गौठानों में से 2029 गौठान स्वावलंबन की सीढ़ी चढ़ चुके हैं। स्वावलंबी गौठान गोबर खरीदी से लेकर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए खुद के पास उपलब्ध राशि का उपयोग करने लगे हैं। इसमें रायगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 249 गौठान स्वावलंबी हुए हैं। दूसरे नंबर पर कबीरधाम जिला है, जिसमें 141 गौठान शामिल हैं और तीसरे क्रम में महासमुन्द जिले के 131 गौठान स्वावलंबी हुए है।
बता दें कि राज्य में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए भूपेश सरकार ने अब तक 10 हजार 569 गांवों में गौठान के निर्माण की स्वीकृति दे दी है। जिसमें से 7 हजार 777 गौठानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही इन गौठानों में गोबर खरीदी, वर्मी कंपोस्ट के निर्माण सहित अन्य आयमूलक गतिविधियां संचालित हो रही है।


मवेशियों के इलाज की व्यवस्था
वर्ममान में 2 हजार 420 गौठानों का निर्माण कराया जा रहा है। शेष 372 गौठानों का निर्माण कार्य अभी शुरू कराया जाना है। इसके अलावा गौठानों में पशुधन के देखरेख, चारा-पानी और मवेशियों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


पैरा दान करने की शुरुआत
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपील पर पशुधन के चारे के लिए किसान भी पैरा दान कर रहे हैं। अब तक 4 लाख 83 हजार क्विंटल से ज्यादा पैरा गौठानों में दान के माध्यम से संग्रहित किया गया है। जिसका मूल्य 200 रुपये प्रति क्विंटल के मान से 9 करोड़ 66 लाख के आसपास है। इसके अलावा गौठानों में पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था के लिए हाईब्रिड नेपियर ग्रास का रोपण और अन्य चारे की बुआई भी की गई है।
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