15 साल सरकार में रह कर की वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और जनता से छल

रायपुर। भाजपा ने छत्तीसगढ़ में 15 साल तक सरकार चलाई। जिसमें सरकार के मुखिया डॉ. रमन सिंह रहे। इस दौरान राज्य में किसानों और छत्तीसगढ़ की जनता से छल कपट उनकी फितरत रही। छल कपट कर 15 साल तक रमन सरकार द्वारा निर्दोष आदिवासियों को जेल में बन्द किया जाता रहा। पांचवी अनुसूची क्षेत्रों को मिले कानूनी अधिकारों को दरकिनार कर ग्राम सभा के अनुमोदन के बिना हजारों आदिवासियों से जमीन छीनी। रमन सरकार के दौरान निरन्तर आदिवासी वर्ग पर अत्याचार, उनके अधिकारों का हनन किया गया। आदिवासी कल्याण के नाम से सरकारी योजना बनाकर बंदरबाट किया गया। आदिवासियों के नाम से योजना बनाकर भारी भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी किया गया, सरकारी खजाने को लूटा गया।

देखा जाए तो भाजपा शासन काल में किसानों, आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों में विकास के नाम पर खानापूर्ति की गई। छत्तीसगढ़ ने भाजपा सरकार के तीनों कार्यकाल में देखा कि चुनाव के दौरान जो वादे किए जाते थे उन्हें कभी पूरा नहीं किया। उनके शासनकाल में विकास के कार्यों के नाम पर ऐसी योजनाएं बनी जो केवल भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को ही बढ़ावा देती रही। ऐसी कई योजनाएं थी जो जनता से सीधे तौर पर नहीं जुड़ी रही। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे तब किसानों से किया वादा पूरा नहीं किए, अब विपक्ष में है तब किसानों को दिए जाने वाले अनुदान सहायता का विरोध कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और भाजपा किसान विरोधी रही। उनके कार्यकाल में किसानों से किए वादों को पूरा नहीं किया गया। मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. रमन सिंह असफल सिद्ध हुए। इसलिए छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 साल के सत्ता के बाद भी पार्टी को 15 सीट में लाकर समेट दिया और उसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा 14 सीट पर सिमट गई।

राशन माफिया का रहा बोलबाला

छत्तीसगढ़ में पीडीएस के तहत चावल के वितरण में अनियमितताएं सामने आई। भाजपा शासन काल में राशन माफिया का बोलबाला रहा उनके शासन काल में यह गड़बड़ी एक लाख करोड़ से अधिक का रहा। छत्तीसगढ़ में पीडीएस के तहत मिलने वाले चावल के वितरण को लेकर घोटाले के आरोप लगे हैं और एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़े अधिकारियों के दफ्तर में भी छापे मारे हैं। इन छापों में मिली एक डायरी से ऐसे संकेत मिले जिससे घोटाले के तार पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के करीब रिश्तेदारों तक जुड़े होने के आरोप भी लगे। ये सिर्फ चावल वितरण के घोटाले की बात नहीं है। 22 लाख फर्जी राशन कार्ड बनाकर मजदूरों के अनाज में हेराफेरी करने वाले 36 हजार करोड़ के नान घोटाला भी हुआ। चावल के साथ गेहूं, चना, शक्कर और कैरोसिन सारी चीज़ों में धांधली की गई।

किसानाों के लिए कुछ नहीं किया

भाजपा ने 2013 के घोषणा पत्र में कहा था कि किसानों को धान खरीदी में 2100 रुपए समर्थन मूल्य देंगे, 5 साल तक 300 रुपए बोनस और उनसे एक-एक दाना धान खरीदेंगे, 5 हार्सपावर पंपों को मुफ्त बिजलीे देने, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशे लागू करने का वादा किया गया था। सस्ते दर पर डीजल और रासायनिक खादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी वादा किया गया था। किसानों की आय दोगुनी करने का सपना दिखाया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। मोदी सरकार तीन काले कृषि कानून लाकर भारत के किसानों को चंद पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बनाना चाहते हैं उनको गुलाम बनाना चाहते हैं यह भाजपा की नीति है।

आदिवासियों के साथ छल

रमन सिंह सरकार में बस्तर क्षेत्र के युवाओं को सरकारी नौकरी से वंचित रखा गया। आउटसोर्सिंग से भर्ती कर उनके हक अधिकार को बेचा गया। रमन सरकार के दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों की लाभांश में हेराफेरी, चरणपादुका खरीदने में भ्रष्टाचार किया गया, 5 लाख वनाधिकार पट्टा निरस्त किया गया था। इन क्षेत्रों में कई फर्जी मुठभेड़ की घटनाएं भी हुई। इनमें नक्सली बताकर आदिवासियों के मासूम बच्चों को मुठभेड़ में मारा गया, झलियामारी बालिका गृह में हुई बलात्कार की घटना, मीना खलखो, सारकेगुड़ा और अंतागढ़ कांड के जरिए आदिवासी क्षेत्रों में कहर बरपाया गया। उद्योगों को बढावा देने के नाम पर आदिवासियों की जमीन को जबरदस्ती अधिग्रहण किया गया। बस्तर और सरगुजा के सुदूर क्षेत्रों को विकास से महफूज रखा गया।

छलकपट की सियासत

छल कपट और धोखाधड़ी की राजनीति रमन सरकार के समय होती थी। झीरम में कांग्रेस नेताओं की पूरी पीढ़ी का नरसंहार भाजपा के छल कपट का सबसे बड़ा जीता जागता सबूत है। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर सुकमा से वापस लौटते समय ठीक उस स्थान पर हमला हुआ जहां रमन सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था हटा ली थी। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दिन सुकमा जिले में विपरीत दिशा में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का दिखावा करके पूरा पुलिस बल वहां भेज दिया था। भाजपा सरकार के इस छल कपट की कीमत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार, दिनेश पटेल, अभिषेक गोलछा, गोपी माधवानी, योगेंद्र शर्मा, जैसे नेताओं को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी।

रमन सरकार के घोटाले

रमन सिंह सरकार के समय कुछ बड़े मामले हुए जिन्हें कुछ लोगों को संरक्षण देने का भी पर्दाफास होता है। इनमें नसबंदी कांड, अंखफोड़वा कांड, गर्भाशय कांड, नकली दवाई, दवा खरीदी घोटाला, मेडिकल उपकरण खरीदी घोटाला, इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाला, रतनजोत घोटाला, चना घोटाला, नमक घोटाला, चरण पादुका घोटाला, मोबाइल घोटाला भी उनके शासन काल में ही हुए।