गरियाबंद में विश्व शांति महिमा सम्मेलन के तहत गौ माता के चरण लेने की

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हर साल होली से पहले विश्व शांति महिमा सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से होती है, जिसमें श्रद्धालु गौ माता के पद लेने की परंपरा निभाते हैं। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं।

गौ माता की शोभायात्रा और गौ पद लेने की परंपरा

इस वर्ष भी 3 किलोमीटर लंबी शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सफेद कालीन बिछाकर गौ माता को चलाया गया। श्रद्धालु कालीन पर लेटकर गौ माता के चरणों का आशीर्वाद लेते हुए गौ पग बाधा बने। इस परंपरा को ‘गौ पद लेना’ कहा जाता है।

देशभर से आए हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए और गौ माता के आशीर्वाद का अनुभव किया। यह आयोजन धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है।

भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय ने लिया गौ पाद

इस आयोजन में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने भी गौ पद लेकर गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा, संघ प्रांत प्रचार प्रमुख संजय तिवारी, प्रांत गौ सेवा प्रमुख वीर अन्ना सफारे, सक्षम संगठन मंत्री राम राजवाड़े, हिंदू जागरण मंच के प्रदेश पदाधिकारी सौरभ दुबे, प्रसिद्ध कथा वाचक युवराज पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप, पालिका अध्यक्ष रिखीराम यादव और जनपद अध्यक्ष मैनपुर मोहना नेताम भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

तीन दिवसीय यज्ञ और विशेष परंपराएं

इस आयोजन के तहत तीन दिनों तक औषधीय काष्ठ से यज्ञ अनुष्ठान किया जाता है। होलिका दहन के अगले दिन श्रद्धालु यज्ञ की राख से तिलक कर होली खेलते हैं। यह परंपरा प्राकृतिक संतुलन और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने के लिए निभाई जाती है।

बाबा उदयनाथ की गौशाला: 800 गौवंश की सेवा

इस आयोजन के प्रेरणास्त्रोत बाबा उदयनाथ आलेख महिमा संप्रदाय के प्रमुख हैं, जिनके 5000 से अधिक अनुयायी हैं। उनकी गौशाला में 800 गौवंश हैं, जिनकी सेवा के लिए 100 से अधिक सेवादार 11 एकड़ में फैले गौशाला सह आश्रम में कार्यरत हैं।

यहां प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और गौ मूत्र से औषधियां तैयार की जाती हैं, जो विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोगी होती हैं। इसके अलावा, आश्रम में शुद्ध दूध, दही, घी और शहद का उत्पादन किया जाता है।

गौ सेवा और नशा मुक्ति अभियान

बाबा उदयनाथ ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य गौ वंश और प्रकृति के प्रति प्रेम और जागरूकता फैलाना है। इसके साथ ही, वे नशा मुक्ति अभियान भी चला रहे हैं, जिससे सैकड़ों लोगों का जीवन बदल चुका है।