घरेलू भोजन की लागत

घरेलू भोजन की लागत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। CRISIL इंटेलिजेंस की ताजा ‘रोटी-राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, रसोई गैस (LPG) और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाल रही हैं।

रिपोर्ट बताती है कि आलू की कीमतों में आई गिरावट से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने उस राहत को काफी हद तक खत्म कर दिया।

एक नजर में मुख्य अपडेट

  • शाकाहारी थाली की लागत सालाना 5% बढ़ी।
  • मांसाहारी थाली की लागत में 6% की वृद्धि हुई।
  • टमाटर की कीमतों में 31% का उछाल दर्ज किया गया।
  • LPG और खाद्य तेल लगभग 10% महंगे हुए।
  • आलू की कीमतों में 14% की गिरावट से सीमित राहत मिली।
  • ब्रॉयलर की कमी से चिकन की कीमतें भी बढ़ीं।

टमाटर और LPG की महंगाई की वजह क्या है?

घरेलू भोजन की लागत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण टमाटर और LPG की बढ़ती कीमतें हैं। CRISIL के अनुसार फरवरी और मार्च में अधिक तापमान के कारण टमाटर की फसल की बुवाई प्रभावित हुई। इसका असर उत्पादन पर पड़ा और बाजार में कीमतें 31 प्रतिशत तक बढ़ गईं।

दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वनस्पति तेल और LPG की आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे इन दोनों उत्पादों की कीमतों में भी लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शाकाहारी और मांसाहारी थाली कितनी महंगी हुई?

रिपोर्ट के अनुसार घरेलू भोजन की लागत में वृद्धि का असर शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थालियों पर दिखाई दिया। जून में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मांसाहारी भोजन में चिकन की कीमतें बढ़ने का प्रमुख कारण अत्यधिक गर्मी रही। गर्म मौसम के कारण पोल्ट्री उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे ब्रॉयलर की उपलब्धता कम हुई और बाजार में कीमतें बढ़ गईं।

मासिक आधार पर भी बढ़ा रसोई का खर्च

घरेलू भोजन की लागत केवल सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि मासिक स्तर पर भी बढ़ी है। जून में मई की तुलना में शाकाहारी थाली की लागत 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 3 प्रतिशत बढ़ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही। हालांकि नई फसल आने के बाद आलू के दाम कुछ कम हुए, लेकिन कुल खाद्य खर्च पर इसका असर सीमित रहा।

आगे आम उपभोक्ताओं को क्या राहत मिल सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सब्जियों की आपूर्ति सामान्य रहती है और मानसून के दौरान उत्पादन बेहतर होता है, तो घरेलू भोजन की लागत में कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि यदि LPG, खाद्य तेल और टमाटर जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में रसोई का मासिक बजट दबाव में रह सकता है।

घरेलू भोजन की लागत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। CRISIL इंटेलिजेंस की ताजा ‘रोटी-राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, रसोई गैस (LPG) और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाल रही हैं।

रिपोर्ट बताती है कि आलू की कीमतों में आई गिरावट से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने उस राहत को काफी हद तक खत्म कर दिया।

एक नजर में मुख्य अपडेट

  • शाकाहारी थाली की लागत सालाना 5% बढ़ी।
  • मांसाहारी थाली की लागत में 6% की वृद्धि हुई।
  • टमाटर की कीमतों में 31% का उछाल दर्ज किया गया।
  • LPG और खाद्य तेल लगभग 10% महंगे हुए।
  • आलू की कीमतों में 14% की गिरावट से सीमित राहत मिली।
  • ब्रॉयलर की कमी से चिकन की कीमतें भी बढ़ीं।

टमाटर और LPG की महंगाई की वजह क्या है?

घरेलू भोजन की लागत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण टमाटर और LPG की बढ़ती कीमतें हैं। CRISIL के अनुसार फरवरी और मार्च में अधिक तापमान के कारण टमाटर की फसल की बुवाई प्रभावित हुई। इसका असर उत्पादन पर पड़ा और बाजार में कीमतें 31 प्रतिशत तक बढ़ गईं।

दूसरी ओर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वनस्पति तेल और LPG की आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे इन दोनों उत्पादों की कीमतों में भी लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शाकाहारी और मांसाहारी थाली कितनी महंगी हुई

रिपोर्ट के अनुसार घरेलू भोजन की लागत में वृद्धि का असर शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थालियों पर दिखाई दिया। जून में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मांसाहारी भोजन में चिकन की कीमतें बढ़ने का प्रमुख कारण अत्यधिक गर्मी रही। गर्म मौसम के कारण पोल्ट्री उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे ब्रॉयलर की उपलब्धता कम हुई और बाजार में कीमतें बढ़ गईं।

मासिक आधार पर भी बढ़ा रसोई का खर्च

घरेलू भोजन की लागत केवल सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि मासिक स्तर पर भी बढ़ी है। जून में मई की तुलना में शाकाहारी थाली की लागत 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 3 प्रतिशत बढ़ गई।

रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही। हालांकि नई फसल आने के बाद आलू के दाम कुछ कम हुए, लेकिन कुल खाद्य खर्च पर इसका असर सीमित रहा।

आगे आम उपभोक्ताओं को क्या राहत मिल सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सब्जियों की आपूर्ति सामान्य रहती है और मानसून के दौरान उत्पादन बेहतर होता है, तो घरेलू भोजन की लागत में कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि यदि LPG, खाद्य तेल और टमाटर जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में रसोई का मासिक बजट दबाव में रह सकता है।

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