30-40 मॉडल का निर्माण प्राथमिकता से हो रहा

12.69 लाख हेक्टेयर भूमि के उपचार का मिलेगा लाभ

राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवा विकास योजना के तहत कैम्पा की वार्षिक कार्ययोजना के तहत सभी निर्माण कार्य पूर्ण कर नाला में भू-जल संरक्षण के लिए निर्मित किए जा रहे विभिन्न संरचनाओं में 30-40 मॉडल एक महत्वपूर्ण विशिष्ट संरचना है, जो हल्की ढलान तथा हल्की पथरीली भूमि और अनउपजाऊ तथा छोटे झाड़ों के वन अथवा बंजर भूमि में काफी फायदेमंद है।

नरवा विकास योजना में इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए राज्य के वनांचल स्थित उछले भागों अथवा ढलान क्षेत्रों में 30-40 मॉडल के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि नरवा विकास योजना के तहत बनाए जा रहे 30-40 मॉडल के बारे में वनांचल के जिन क्षेत्रों में मिट्टी की गहराई 0.60 मीटर तथा मुरमी मिट्टी, हल्की पथरीली भूमि, अनउपजाऊ भूमि, छोटे झाड़ों के वन और बंजर भूमि में यह मॉडल बहुत उपयुक्त है। इसके निर्माण से कुछ दिनों के पश्चात् उक्त क्षेत्रों की भूमि उपजाऊ होने लगती है। 30-40 मॉडल में वर्षा जल को छोटे-छोटे चोकाकर मेड़ों के माध्यम से एक निर्धारित साइज के गड्डे में भरते है और इसे श्रृंखला में बनाने से उक्त स्थल में नमी अतिरिक्त समय तक बनी रहती है। इस पद्धति में कार्य करने से वर्षा के जल को काफी देर तक रोका जा सकता है।

कैम्पा मद से हो रहे कार्य

राज्य के वनांचल में नरवा विकास योजना के तहत कई कार्य कराए जा रहे हैं। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी ‘नरवा विकास योजना’ के तहत प्रदेश के वन क्षेत्रों में स्थित नालों में कैम्पा मद की वार्षिक कार्ययोजना वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 के भाग- एक तथा दो के तहत अब तक 30 लाख 60 हजार भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण पूर्ण हो गया है तथा 20 लाख 20 हजार संरचनाओं का निर्माण प्रगति पर है। भू-जल संरक्षण संबंधी इन संरचनाओं के निर्माण से 12 लाख 69 हजार हेक्टेयर भूमि के उपचार का लाभ मिलेगा।

पांच हजार से अधिक संरचानाओं का निर्माण जारी

राज्य में कैम्पा मद के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में 160 करोड़ 95 लाख रूपए की राशि से 1 हजार 829 किलोमीटर लम्बाई के विभिन्न नालों में भू-जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इन संरचनाओं के पूर्ण होने पर 4 लाख 84 हजार 281 हेक्टेयर भूमि उपचारित होगी। इसी तरह वर्ष 2020-21 भाग- एक तथा दो के अंतर्गत 398 करोड़ 29 लाख रूपए की राशि से 4 हजार 160 किलोमीटर लम्बाई के विभिन्न नालों में भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण जारी है। इनके निर्माण से 7 लाख 85 हजार 146 भूमि उपचारित होगी।

कहां कितना हुआ संरचना निर्माण

वन वृत्तवार वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 भाग- एक तथा दो के अंतर्गत दुर्ग में 505 किलोमीटर लम्बाई के विभिन्न नालों में 4 लाख 28 हजार 521 तथा बिलासपुर में 1517 किलोमीटर लम्बाई के विभिन्न नालों में 14 लाख 75 हजार 341 भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण प्रगति पर है। इसी तरह वन वृत्त रायपुर में 847 किलोमीटर लम्बाई के नालों में 4 लाख 89 हजार 449, जगदलपुर में 617 किलोमीटर लम्बाई के नालों में 8 लाख 16 हजार 689, सरगुजा में 1140 किलोमीटर लम्बाई के नालों में 9 लाख 96 हजार 494 तथा वन वृत्त कांकेर के अंतर्गत 816 किलोमीटर लम्बाई के विभिन्न नालों में 4 लाख 73 हजार 790 एवं वन प्राणी वृत्त के अंतर्गत 547 किलोमीटर लम्बाई के नालों में 4 लाख 00 हजार 312 भू-जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण जारी है ।

ऐसे होता है संरचना निर्माण

वन क्षेत्रों में स्थित नालों में भू-जल संरक्षण कार्यों के लिए लूज बोल्डर चेकडेम, बोल्डर चेकडेम, ब्रशवुड चेकडेम, कंटूर ट्रेंच, गल्ली प्लग, परकोलेशन टैंक, अर्दन डेम, चेकडेम, एनीकट, स्टापडेम, डाइक, अंडरग्राउंड डाइक तथा गेबियन आदि संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इससे एक ओर वन भूमि के क्षरण को रोका जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर जल भण्डार में वृद्धि की जा सकेगी। इसके साथ ही वनों के आसपास के ग्रामीणों तथा कृषकों को पेयजल एवं सिंचाई के साधन विकसित करने में भी काफी मदद मिलेगी।