परिश्रम अथवा कार्य ही मनुष्य की पूजा अर्चना है । मनुष्य के जीवन में परिश्रम का बहुत महत्व होता है। हर प्राणी के जीवन में परिश्रम का बहुत महत्व होता है।
आज हम ले कर आए हैं आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार उनके विचार भले ही कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। ये तो आप भी जानते हैं की भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दिया जाता है , लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार आप सभी की सफलता के लिए है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति मेहनत करने से घबराता है, उसके लिए सफलता का सुख नहीं है। सफलता का सुख उसे ही मिलता है जो अपने कार्य और लक्ष्य को पूरा करने के लिए कठोर परिश्रम करने के लिए तैयार रहता है। ये तो आप जानते हैं की प्रकृति का कण-कण बने हुए नियमों से अपना-अपना काम करता है। चींटी का जीवन भी परिश्रम से ही पूर्ण होता है। मनुष्य परिश्रम करके अपने जीवन की हर समस्या से छुटकारा पा सकता है।

चाणक्य के अनुसार सफलता का रास्ता कठोर परिश्रम से होकर जाता है। इसलिए कभी भी परिश्रम से न घबराएं और निरंतर मेहनत करते रहें। चाणक्य के अनुसार कठोर परिश्रम करने वालों को लक्ष्मी जी अपना आशीर्वाद जरूर देती हैं।

ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो परिश्रम से सफल न हो सकें। जो पुरुष दृढ प्रतिज्ञ होते हैं उनके लिए विश्व का कोई भी कार्य कठिन नहीं होता है। वास्तव में बिना श्रम के मानव जीवन की गाड़ी चल नहीं सकती है। श्रम से ही उन्नति और विकास का मार्ग खुल सकता है। परिश्रम और प्रयास की बहुत महिमा होती है।