ईरान इज़राइल युद्ध का तनाव अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके गंभीर असर अब वैश्विक स्तर पर देखे जा रहे हैं।
हाल ही में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की गई, जिसके जवाब में ईरान ने ऑपरेशन “Glad Tidings of Victory” के तहत क़तर स्थित अमेरिकी एअरबेस अल-उदैद पर मिसाइल दागीं।
अमेरिका की सैन्य मौजूदगी पर सीधा हमला
ईरान द्वारा दागी गई 6 मिसाइलों में से केवल 1 को ही अमेरिका और क़तर की संयुक्त रक्षा प्रणाली रोक पाई। इससे यह साफ हो गया है कि रक्षा तैयारियों के बावजूद खतरा अत्यधिक बना हुआ है।
इस हमले के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देश हाई अलर्ट पर हैं। इज़राइल ने अपने उत्तरी और दक्षिणी सीमाओं पर मिसाइल-रोधी प्रणाली और वायु सेना को पूर्ण सतर्क कर दिया है।
वैश्विक बाजार पर असर: तेल की कीमतें उछली
जैसे ही ईरान इज़राइल युद्ध ने गंभीर मोड़ लिया, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक 9% तक उछाल आया। इसके कारण भारत समेत कई तेल आयातक देशों की चिंताएँ बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में भारी बढ़ोतरी संभव है।
सुरक्षा परिषद की आपात बैठक की मांग
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कई देश इस विषय पर आपात बैठक बुलाने की मांग कर चुके हैं। विश्व में शांति और स्थिरता की अपीलों के बावजूद दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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