छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है, जिसमें विभाग के ही एक कर्मचारी पर करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगा है। रवेली वितरण केंद्र में तैनात कार्यालय सहायक मनोज कुमार साहू ने कथित तौर पर 3.17 करोड़ रुपये की राशि में हेराफेरी की, जो करीब चार साल तक बिना किसी शक के जारी रही।

राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर गायब की रकम
प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने राजस्व राशि को सिस्टम में दर्ज कर नकद ब्योरा और सीआरए तैयार किए। दस्तावेजों में सब कुछ सामान्य दिखता रहा, लेकिन असल में रकम कभी बैंक में जमा नहीं हुई। इस तरीके से विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ।

155 मामलों में सामने आई अनियमितता
जांच एजेंसियों ने 155 मामलों में गड़बड़ी पाई है। इनमें 136 मामलों में नकद ब्योरा और राजस्व लेखा तैयार किया गया था, जबकि 19 मामलों में लेखा तक नहीं बनाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी केस में पैसा बैंक में जमा नहीं मिला।

फर्जी बैंक स्लिप से छिपाया घोटाला
घोटाले को छिपाने के लिए आरोपी ने फर्जी बैंक स्लिप का सहारा लिया। फाइलों में सिर्फ स्लिप की फोटोकॉपी लगाई गई थी। जब बैंक रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तो सामने आया कि कोई रकम जमा ही नहीं हुई। कई दस्तावेजों में तारीख और रकम में छेड़छाड़ भी पाई गई।
जाली हस्ताक्षर से बनाए दस्तावेज

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कनिष्ठ अभियंता के नाम पर जाली हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों को वैध दिखाने की कोशिश की। इससे पूरे मामले को लंबे समय तक छिपाए रखा गया।

पुलिस कार्रवाई शुरू
मामले की शिकायत सहायक अभियंता सुनील कुमार गुप्ता द्वारा 25 अप्रैल को पिपरिया थाना में दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी अमित कुमार कश्यप ने बताया कि आरोपी के खिलाफ IPC की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है और जल्द ही उससे पूछताछ की जाएगी।