० पाटन ब्लॉक के झीट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बनेगा ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई
० बीमारियों की जांच, सर्विलेंस, अनुसंधान और तकनीकी स्टॉफ के प्रशिक्षण में मिलेगी मदद

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाने वाली बीमारियों के समुचित निदान के लिए राज्य में मॉडल ग्रामीण एवं स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई की स्थापना के लिए मध्य अनुबंध किया गया।
आईसीएमआर द्वारा देश के 18 राज्यों में कार्य किया जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इनका कार्यक्षेत्र होगा। इस ग्रामीण अनुसंधान इकाई की स्थापना दुर्ग जिले के विकासखंड पाटन अंतर्गत ग्राम झीट में किया जाएगा।

इकाई की स्थापना से राज्य के ग्रामीण अंचलों के साथ दुर्ग, भिलाई, रायपुर आदि नगरों में फैलने वाली बीमारियों मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू आदि के परीक्षण और निदान में सुविधा होगी। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के झीट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई स्थापित की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की मौजूदगी में आज उनके निवास कार्यालय में सीजीएमएससी और आईसीएमआर के बीच इसके निर्माण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक कार्तिकेय गोयल और आईसीएमआर की ओर से राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के निदेशक डॉ. अपरूप दास ने अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए।

बीमारियों के पूर्वानुमान में मिलेगी मदद

राज्य शासन के सीजीएमएससी द्वारा आईसीएमआर की संस्था राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के सहयोग से झीट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो करोड़ रुपए की लागत से 11 हजार वर्गफीट में मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई की स्थापना की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने एमओयू के मौके पर कहा कि एमआरएचआरयू से प्रदेश में विभिन्न बीमारियों की जांच, अनुसंधान, सर्विलेंस और बीमारियों के पूर्वानुमान में मदद मिलेगी।

वेक्टरजनित बीमारियों के परीक्षण की सुविधा

यहां के वैज्ञानिकों, चिकित्सा वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ तकनीकी स्टॉफ द्वारा स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की लेबोरेटरी में कार्यरत तकनीशियनों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ को प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वेक्टरजनित बीमारियों के परीक्षण के लिए नमूना जबलपुर एवं अन्य संस्थानों में भेजा जाता है। झीट में ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई की स्थापना से स्थानीय स्तर पर ही इस तरह के परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा मिलेगी।

मंत्री सिंहदेव ने कहा निर्माण जल्द पूरा करें

श्री सिंहदेव ने ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई के निर्माण में सहयोग के लिए आईसीएमआर को धन्यवाद दिया। उन्होंने सीजीएमएससी को शुभकामना देते हुए इसका निर्माण तेजी से पूर्ण करने कहा। एमआरएचआरयू के लिए सीजीएमएससी और आईसीएमआर के बीच एमओयू के दौरान अनुसंधान परामर्श समिति के अध्यक्ष डॉ. अरविंद नेरल, सीजीएमएससी के महाप्रबंधक सुनील कुमार सिंह, कार्यकारी अभियंता निशांत सूर, राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ. राजीव यादव और डॉ. रवीन्द्र कुमार तथा प्रशासनिक अधिकारी डॉ. आरके ठाकुर भी मौजूद थे।