मध्य प्रदेश में मानसून विदाई से पहले बारिश फिर बढ़ने वाली है। एमपी में तेज बारिश का असर 24 और 25 सितंबर को दिख सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके बाद दो दिनों तक कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में ज्यादा असर रहेगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश होने के आसार हैं। करीब 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
एमपी में तेज बारिश का दौर 23 सितंबर से बढ़ेगा
प्रदेश में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मौसम बदलेगा। इसके प्रभाव से 23 सितंबर से बारिश बढ़ने लगेगी। हालांकि, 24 और 25 सितंबर को गतिविधियां ज्यादा रह सकती हैं।
पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में इसका असर ज्यादा रहेगा। जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग पर विशेष नजर रहेगी। वहीं, भोपाल और नर्मदापुरम में भी बारिश हो सकती है।
मानसून की विदाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हो सकती है। इसलिए यह बारिश प्रदेश के आंकड़ों को सुधार सकती है।
एमपी में तेज बारिश से इन संभागों पर ज्यादा असर
पूर्वी हिस्से में बारिश की स्थिति कुछ बेहतर हुई है। फिर भी कई जिलों में कमी बनी हुई है। आने वाले दिनों की बारिश से यह अंतर और घट सकता है।
- जबलपुर संभाग में कई जिलों में बारिश की संभावना है।
- रीवा और शहडोल संभाग में भी गतिविधियां बढ़ेंगी।
- सागर संभाग के जिलों में भारी बारिश हो सकती है।
- भोपाल और नर्मदापुरम में भी बारिश का असर रहेगा।
प्रदेश में अब तक 33.7 इंच बारिश दर्ज
मध्य प्रदेश में अब तक 856.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यह करीब 33.7 इंच के बराबर है। इस अवधि में सामान्य बारिश 922.6 मिमी होनी चाहिए थी।
इस हिसाब से प्रदेश में बारिश छह प्रतिशत कम है। पूर्वी हिस्से में कमी करीब दो प्रतिशत है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में यह आंकड़ा दस प्रतिशत तक है।
हालांकि, हाल की बारिश से पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति सुधरी है। आने वाले दौर से आंकड़ों में और बदलाव हो सकता है।
23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इनमें पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्रों के जिले शामिल हैं।
- अनूपपुर, छतरपुर, मैहर और मऊगंज में अधिक बारिश हुई।
- पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली भी शामिल हैं।
- टीकमगढ़, उमरिया और आगर-मालवा में भी अधिक बारिश हुई।
- भोपाल, भिंड, दतिया और गुना में आंकड़े सामान्य से ऊपर हैं।
दूसरी ओर, कई जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में कमी 5 से 23 प्रतिशत है। पश्चिमी हिस्से में यह अंतर 7 से 49 प्रतिशत तक पहुंचा है।
जून की कमी अब भी आंकड़ों में मौजूद
इस मानसून सीजन में जून की कम बारिश का असर बना हुआ है। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश दर्ज हुई।
हालांकि, मानसून में दो बार ब्रेक भी आया। इससे कुछ समय तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं। बाद में जुलाई के अंतिम दिनों में बारिश ने रफ्तार पकड़ी।
अगस्त में भी अच्छी बारिश हुई और महीने का कोटा पूरा हुआ। इसके बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी।
सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच मानी जाती है
मध्य प्रदेश में मानसून सीजन की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में औसत करीब 38 से 39 इंच रहता है।
एमपी में तेज बारिश का नया दौर इन आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है। 24 और 25 सितंबर की बारिश से कई जिलों को राहत मिल सकती है। हालांकि, बारिश की वास्तविक मात्रा स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
बारिश के आंकड़ों पर रहेगी नजर
एमपी में तेज बारिश के बीच किसानों और स्थानीय प्रशासन की नजर मौसम पर रहेगी। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। निचले इलाकों में भी अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी।
कुल मिलाकर, सितंबर के अंतिम दिनों में मौसम सक्रिय रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है। पश्चिमी जिलों में भी कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है।
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