नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण पेश किया। वित्तीय निवेश और संपत्ति से जुड़े विवादों के बीच उठ रहे सवालों को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। उनका कहना है कि किसी भी पद से अधिक जरूरी जनता का विश्वास और पारदर्शिता है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में गुरुंग ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ उठे सवालों की निष्पक्ष जांच के लिए पद पर बने रहना उचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता ही सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
गुरुंग ने युवाओं की बदलती सोच का जिक्र करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है। उन्होंने ‘Gen Z’ के बढ़ते प्रभाव को स्वीकारते हुए कहा कि नेतृत्व को हर स्थिति में जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के प्रति उठने वाले सवालों का जवाब केवल नैतिकता और ईमानदारी से ही दिया जा सकता है।
उन्होंने माना कि पद पर रहते हुए हितों के टकराव की आशंका बनी रहती है, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्होंने स्वयं पद छोड़कर निष्पक्ष जांच का मार्ग प्रशस्त किया। गुरुंग ने नागरिकों, मीडिया और युवाओं से भी अपील की कि वे ईमानदारी और आत्म-सुधार के रास्ते पर चलें।
गौरतलब है कि नेपाल में हाल के दिनों में राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सख्ती बढ़ी है। इससे पहले एक अन्य मंत्री को भी पद के दुरुपयोग के आरोपों के चलते हटाया जा चुका है। ऐसे में गुरुंग का इस्तीफा देश की राजनीति में नैतिक मूल्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
