प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर चल रहे विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को अहम राहत दी है। अदालत ने अपील दायर करने में हुई देरी पर आपत्ति दाखिल करने के लिए विश्वविद्यालय को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने अदालत में साफ शब्दों में कहा कि पीएम मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी की मांग का कोई ठोस आधार नहीं है और यह पूरा मामला केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी तर्क दिया कि आरटीआई कानून का उपयोग व्यक्तिगत जानकारियों को उजागर करने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपील में हुई देरी और मामले के गुण-दोष दोनों पर विस्तार से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

वहीं, अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि देरी केवल 15 से 45 दिनों की है, जिसे न्यायालय आसानी से माफ कर सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि यदि DU मुख्य अपील पर जवाब देना चाहता है तो औपचारिक नोटिस जारी किया जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नोटिस जारी करना भी केवल सनसनी फैलाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

गौरतलब है कि यह अपील दिल्ली हाईकोर्ट के उस एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें 25 अगस्त 2025 को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आदेश को रद्द कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि केवल सार्वजनिक पद पर होने के आधार पर किसी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।