छत्तीसगढ़ की सियासत में ढाई-ढाई साल के सीएम का जिक्र बार-बार हो रहा है। नए सीएम की चर्चा का बाजार अब भी गर्म है। एक तरफ सरगुजा नरेश का पक्ष और तो दूसरी तरफ दाऊ का। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का ढाई साल तो बीच चुका है, लेकिन इन दिनों जो सियासी उठा पटक मची हुई है उससे तो ये लग नहीं रहा कि सीएम की कुर्सी का खेल अभी खत्म हो गया है। जब प्रदेश में स्थिर सरकार है तो फिर बार-बार नए सीएम का जिक्र क्यों हो रहा है। छत्तीसगढ़ में दमदारी से सरकार चला रही कांग्रेस के भीतर क्या वाकई उहापोह की स्थिति है? अगर ऐसा नहीं है तो दिल्ली में ‘छत्तीसगढ़ डोल रहा है, बाबा-बाबा बोल रहा है’ के नारे लगाने वाले कौन हैं? या क्या कोई है जो कांग्रेस में फूट डालने की कोशिश कर रहा है?
दिल्ली की सड़कों पर टीएस सिंहदेव के समर्थन में लगे नारे आखिर किस ओर इशारा कर रहे हैं? दरअसल महंगाई, बेरोजगारी समेत कई मुद्दों को लेकर केंद्र के खिलाफ युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता संसद घेराव करने निकले थे, जिसमें छत्तीसगढ़ से गए युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शामिल रहे। प्रदर्शन शुरू हुआ तो छत्तीसगढ़ से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने टीएस सिंहदेव के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। काफी देर तक ये नारेबाजी चलती रही।
इसमें कितनी सच्चाई है?
छत्तीसगढ़ में जो अभी सियासी हालात हैं, उसे देखते हुए इस नारेबाजी के कई मायने निकाले जा रहे है। क्या छत्तीसगढ़ वाकई बाबा-बाबा बोल रहा है या बुलवाया जा रहा है? आखिर वास्तविकता क्या है? ये तो वक्त बताएगा, लेकिन टीएस सिंहदेव के समर्थन में हुई इस नारेबाजी ने प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस मामले को विधायक बृहस्पति सिंह से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर जान से मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया था और बाद में बृहस्पति सिंह ने ही अपने बयान के लिए माफी भी मांगी।
दिल्ली में दिख रहा सत्ता का संघर्ष: बीजेपी
इतना सब हो गया तो भला विपक्ष भी कैसे शांत बैठती? विपक्ष को एक बार फिर कांग्रेस सरकार पर तंज कसने का मौका मिल गया। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस में सत्ता के लिए कितना संघर्ष है ये दिल्ली की सड़कों पर दिख रहा है।
पटाक्षेप होने के बावजूद ये शोर क्यों? सीएम की कुर्सी के इस मसले पर तो पूर्ण विराम लग गया था। खुद मंत्री सिंहदेव ने इस पर बयान देते हुए कहा था कि इस मामले का पटाक्षेप हो चुका है। अब सवाल ये है कि दिल्ली की सड़कों पर नारेबाजी करते सिंहदेव समर्थकों के निशाने पर बृहस्पति सिंह थे, या फिर टीएस सिंहदेव शक्ति प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं ? पूरी बहुमत के साथ खड़ी सरकार होने के बावजूद नए सीएम का ये शोर क्यों मचाया जा रहा है?
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