महिला एवं बाल विकास विभाग ने राज्य में पोषण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए नई पहल की है। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में महिला सशक्तिकरण, बाल विकास और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य बातें
- विभाग और उद्योगों के बीच राज्य स्तरीय बैठक हुई।
- आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन पर जोर दिया गया।
- महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर चर्चा हुई।
- कुपोषण उन्मूलन को प्राथमिकता दी गई।
- सीएसआर परियोजनाओं के विस्तार की योजना बनी।
पोषण कार्यक्रम को मिलेगी नई मजबूती
बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव शहला निगार ने की। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए उद्योगों की भागीदारी से योजनाओं का प्रभाव और बढ़ेगा।
उन्होंने उद्योगों से दीर्घकालिक सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से राज्य के विकास को नई गति मिलेगी।
पोषण कार्यक्रम में शामिल होंगे कई नवाचार
महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में डिजिटल संसाधन, शिक्षण सामग्री, स्वच्छ पेयजल और खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा पोषण वाटिका, मुनगा पौधारोपण, किशोरियों के स्वास्थ्य, दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इससे बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योगों ने सहयोग का दिया भरोसा
बैठक में उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग की योजनाओं में सहयोग करने की सहमति दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं पर अपने सुझाव भी साझा किए। विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय की व्यवस्था विकसित करने का निर्णय लिया गया।
भारत सरकार के ‘पंखुड़ी’ पोर्टल और राज्य के ‘स्टेट सीएसआर’ पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं का बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रमुख अपडेट
- उद्योगों की सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी।
- कुपोषण उन्मूलन पर विशेष फोकस रहेगा।
- आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण होगा।
- सीएसआर परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी।
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