समितियों के सुझाव पर सरकार कर रही विचार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू होगी इसके पहले मार्कफेड ने सारी तैयारियों पूरी कर ली है। समिति प्रबंधकों ने मांग की है कि धान खरीदी के बाद एक प्रतिशत से अधिक सूखत होने पर समितियों के जिम्मे आता है। चूंकि परिवहन की जिम्मेदारी विपणन संघ की होती है, अत: 31 मार्च के बाद खरीदी केंद्रों में धान बचता है तो सूखत की जिम्मेदारी विपणन संघ की होनी चाहिए। उनके सुझाव को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस साल परिवहन के लिए निविदा खरीदी शुरू करने सेंं पहले ही जारी कर दिया। खरीदी शुरू करने के पहले दिन से धान का उठाव होने से उपार्जन केंद्रों में धान खराब होने के मामले को कम किया जा सकता है।

समिति प्रबंधकों ने धान उपार्जन नीति को लेकर कई बिंदुओं पर विचार करने के अलावा कमीशन बढ़ाने और कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की है। धान खरीदी की तिथि अभी तय नहीं हुई है, लेकिन उपसमिति द्वारा उनकी मांगों को लेकर सहमति बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है। प्रदेश की 2058 समितियों में धान खरीदी की व्यवस्था बनाने वाले समिति प्रबंधकों ने धान सूखत की राशि कटौती और अन्य कई मुद्दों को लेकर माह जुलाई में बड़ा आंदोलन किया था।

समितियों ने दिए सुझाव

समिति धान उपार्जन नीति में बदलाव करने के अलावा अन्य मांगों का पत्र उपसमिति को सौंप दिया है। समितियों ने कई ऐसे सुझाव भी दिए हैं, जिसमें धान को खराब होने से बचाने के अलावा उसकी मिलिंग भी जल्द होने की उम्मीद है। उपसमिति के सदस्यों ने कई मांगों को मान लिया है, इसके तहत कमीशन बढ़ाने और कई अन्य मांगें हैं।

धान उठाव करने मिले 7 दिन का समय

समिति प्रबंधक संघ के अध्यक्ष प्रभाकर सिंह ने बताया कि धान खरीदी के संबंध में यह सुझाव दिया है कि धान खरीदी के 10 प्रतिशत बफर स्टॉक का निर्धारण पहले से किया जाए। साथ ही धान खरीदी की तिथि तय करने से पहले ट्रासंपोर्ट के लिए निविदा बुलाई जानी चाहिए। खरीदी के बाद धान उठाव के लिए 72 घंटे का समय पर्याप्त नहीं होता, अत: उठाव के लिए 7 दिन का समय निर्धारित किया जाए। वहीं जहां पर पहले दिन से अधिक धान खरीदी होती है, वहां पर विपणन संघ के संग्रहण केंद्रों को पहले से खोला जाए। समितियों को धान उपार्जन नीति में परिवहन की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन धान परिवहन के लिए टीओ और डीओ काटने का अधिकार विपणन संघ को दिया गया है। व्यावहारिकता में इसके कारण धान के उठाने में देर होती है। उपार्जन नीति में इसे हटाना चाहिए।

पंजाब की तरह दें कमीशन

समिति प्रबंधकों ने कहा कि धान खरीदी को लेकर समितियों को दिए जाने वाले सुरक्षा व्यय, प्रासंगिक व्यय की राशि में पिछले कई साल से परिवर्तन नहीं किया गया है। समितियों को इसके चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। छत्तीसगढ़ में 2012-13 से धान पर प्रति क्विंटल कमीशन की राशि लगभग 32 रुपए दी जाती है। पंजाब राज्य में धान खरीदी के लिए समितियों को 46.70 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन दिया जाता है। पंजाब राज्य के बराबर कमीशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। साथ ही सुरक्षा व्यय को 15 रुपए से बढ़ाकर 25 रुपए और प्रासंगिक व्यय को 17 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए करने की मांग की गई है।