रायपुर। दीपावली के बाद अब पूरे देश में छठ पूजा की तैयारी चल रही है। ऐसे में बिलासपुर के अरपा नदी स्थित छठ घाट की चर्चा पूरे देश में की जाती है। क्योंकि अरपा का यह छठ घाट देश का सबसे बड़ा और स्थाई घाट है। यहां एक साथ 50 हजार व्रती अर्ध्य देने पहुंचते हैं। इसके लिए हर साल जोरदार आयोजन भी किया जाता है।
पूवोत्तर राज्यों जैसे उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड के साथ अब छत्तीसगढ़ में भी छठ पर्व काफी उत्साह के साथ मनाए जाने लगा है। शहर के सरकंडा और तोरवा पुल के पास बनाए गए घाट में छठ पर्व मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां उत्सव का माहौल नजर आता है और आयोजन के दौरान मेले सा दृष्य दिखाई होता है। यह सामूहिक आयोजन पाटली पुत्र संस्कृति विकास मंच के साथ जिला प्रशासन की देखरेख में होता है।
8 एकड़ में फैला छठ घाट
समिति के पदाधिकारियों की मानें तो बिहार में छठ पूजा के लिए कई घाट हैं। सिर्फ पटना में ही 82 घाट हैं। लेकिन सभी घाटों का क्षेत्रफल 100 से 200 मीटर है। जबकि तोरवा स्थित छठ घाट करीब 8 एकड़ में फैला हुआ है। घाट में नगर निगम ने करीब एक किलोमीटर में पूजा व अर्ध्य देने के लिए सीढियों का (पचरी) का निर्माण कराया है। लिहाजा यहां 50 हजार व्रर्ती एक साथ यहां अर्ध्य दे सकते हैं।
नहाए खाय से होगी पर्व की शुरुआत
यह सबसे कठिन व्रत में से एक है। इस दौरान महिलाएं 36 घंटे का व्रत रखती हैं। पर्व में छठी मइया और सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व की शुरूआत इस बार 8 नवंबर को नहाए खाय से होगी। 9 नवंबर को खरना और 10 नवंबर की शाम डूबते सूर्य को अर्ध्य देकर 36 घंटे तक व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्ध्य देकर पर्व का समापन होगा और व्रत का पारण किया जाएगा।
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