वास्तविकता से परे है लोकप्रियता का ये आंकलन !

गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी रोकने में नाकाम रही मोदी सरकार

रायपुर। देश की सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ने का दावा किया जा रहा हे। वहीं देश की बात करें तो पिछले सात साल में मोदी सरकार फ्लाप रही। देश में नोटबंदी के अविवेक पूर्ण निर्णय से देश की अर्धव्यवस्था चौपट हो गई। जीएसटी लगने से उद्योग धंधे कल-कारखाने बंद हुए और बहुतायात संस्था में लोग बेरोजगार हुए जिससे देश की अर्थव्यवस्था में विपरीत असर पड़ा है। वहीं निजीकरण को बढ़ावा देने से सरकारी संस्थान नीलाम हो रही है। एयरपोर्ट, रेल्वे बैंक को निजी हाथों में देने से अवैध कारोबार बढ़ने एवं देश की सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सीधे तौर पर सरकारी नियंत्रण समाप्त हो जाएगा।

मोदी सरकार के समय देश की सीमा का सुरक्षा करने में नकाम साबित हुआ है। चीन भारत के अंदर घुसकर कब्जा किया। हमारा पडोसी देश नेपाल भी हमसे दुर चला गया। इसी प्रकार इनका विदेश नीति भी असफल साबित हुई। मोदी सरकार के इन 7 वर्षो से अधिक के कार्यकाल में सभी आवश्यक वस्तुओ के दर के बेताहासा वृ़द्धि हुई। दैनिक आवश्यकता की वस्तु से लेकर डीजल पेट्रोल खाद्य सामग्री के दाम इन वर्षो में 1 से डेढ़ गुना बढ़ा है। इसके अनुपात में आम आदमी की आय नही बढी जिससे गरीबी बढ़ी।

किसानों के साथ छल

किसानो के आय में दोगुना बढोतरी की बात झूठी साबित हुई। वहीं एक लाख करोड़ का किसानों के लिए राहत पैकेज का अता-पता नहीं देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान 30 फीसदी है। फिर भी केन्द्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के बजट में खाद की सब्सिडी में 54,417 करोड़ की कटौती की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार में आने के पूर्व स्वामीनाथन कमेटी के रिर्पाट को लागू कर किसान की आय में दो गुना बढ़ोतरी करने की बात कही थी,सरकार मे आने के बाद उसके विपरीत तीन कृषि कानून लाकर किसानो के साथ धोखा किया जिससे किसान व्यथित है।

तीन कृषि कानून का यह होगा प्रभाव

तीन कृषि कानून लाकर मण्डी व्यवस्था को समाप्त कर सहकारिता को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। काटेंक्ट फार्मिग लाकर बड़े उद्योग घराने को कृषि क्षेत्र मे संरक्षण एवं छोटे किसान के गला घोटने का काम किया जा रहा हे। आवश्यक वस्तु अधिनियम का अस्तित्व समाप्त कर जमाखोरी को बढ़ावा देने का काम किया है।

कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम

राष्ट्रीय आपदा कोविड-19 कोरोना के संक्रमण को रोकने के सरकार नाकाम सिद्ध हुई है। वैक्सीनेशन में भी सरकार की नीति अविवेकपूर्ण रही। देश के नागरिकों के लिए पर्याप्त वैक्सीन न होते हुए भी विदेशों में सप्लाई की गई यह देश की जनता के साथ सबसे बड़ा धोखा किया गया। टीकाकरण राष्ट्रीय कार्यक्रम होता है। इससे पहले जितनी की सरकारें बनी पोलियो, चेचक, खसरा, का टीका अपने देश के नागरिकों को नि:शुल्क लगाने का काम किया परन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार अपने नागरिकों से राज्य सरकारों से टीकाकरण का पैसा वसूलकर सुपर-डुपर फेलुवर सरकार की छवि बनाई है।

देश की सीमाओं से घुसपैठ रोकने में नाकाम

‘राष्ट्र सर्वप्रथम’ के शीर्षक के तहत किए गए वादों में सबसे प्रमुख घुसपैठियों की समस्या का समाधान है। इस समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार ने सिजिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) भी लागू किया, लेकिन सच यह है कि यूपीए सरकार ने 2005 से 2013 के बीच 82,728 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दो हज़ार से भी कम बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया। तो घुसपैठियों को वापस भेजने के वादे का क्या हुआ? घुसपैठ रोकना यदि मोदी सरकार की प्राथमिकता थी तो कैसे चीन भारत की सीमा में घुसपैठ करके बैठ गया और खुद प्रधानमंत्री संसद में गलत जानकारियां देते रहे।

बहरहाल प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का जो आंकलन आज लोगों के सामने आया है, वो तो वैश्विक स्तर पर है। जिसमें पीएम एक मजबूत नेता के तौर पर उभरे हैं, जो ‘दूर के ढोल सुहावने’ की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। लेकिन पिछले सात साल का जो कार्यकाल रहा है, असल में जो देश के हालात हैं और चीजों को संभालने में प्रधानमंत्री की जो असमर्थता है उसका आंकलन करना भी जरूरी है।