महासमुंद जिले में सामुदायिक वन प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं से आवेदन मांगे गए हैं। यह प्रक्रिया धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत संचालित की जा रही है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
मुख्य बातें
- 10 अगस्त तक आवेदन स्वीकार होंगे।
- तकनीकी सहयोगी संस्थाओं का चयन किया जाएगा।
- ग्राम सभाओं को मिलेगा तकनीकी मार्गदर्शन।
- वन संसाधनों के संरक्षण पर रहेगा फोकस।
- केंद्र सरकार वित्तीय सहायता देगी।
सामुदायिक वन प्रबंधन को मिलेगा तकनीकी सहयोग
कलेक्टर आदिवासी विकास कार्यालय के अनुसार चयनित संस्थाएं ग्राम सभाओं के साथ मिलकर सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजनाएं तैयार करेंगी। साथ ही इन योजनाओं के प्रभावी संचालन में भी सहयोग देंगी।
यह कार्य भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और संबंधित विभागों के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
सामुदायिक वन प्रबंधन में निभानी होगी महत्वपूर्ण भूमिका
चयनित संस्थाओं को ग्राम सभाओं का क्षमता विकास करना होगा। इसके साथ वन भूमि का सर्वेक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग और जैव विविधता का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।
सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को तकनीकी हैंडहोल्डिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
वन संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर
इस पहल से जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
योजना का उद्देश्य ग्राम सभाओं को आत्मनिर्भर बनाना और वन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रमुख अपडेट
- आवेदन की अंतिम तिथि 10 अगस्त।
- तकनीकी संस्थाओं का चयन होगा।
- ग्राम सभाओं को प्रशिक्षण मिलेगा।
- वन संसाधनों की मैपिंग होगी।
- केंद्र सरकार देगी वित्तीय सहायता।
यह भी पढ़ें:
बृजभूषण शरण सिंह मामला: 3 साल कानूनी लड़ाई के बाद अदालत का फैसला
महानदी गंगा आरती से धमतरी के रुद्रेश्वर धाम को नई पहचान
E-20 ईंधन विवाद: केजरीवाल का मार्च, याचिका करेंगे सौंपने की कोशिश
