छत्तीसगढ़ में श्रमिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया है। इसके साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। डिजिटल सेवाओं से सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया गया है।
श्रम विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत किया है। प्रदेश में अब कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इनमें 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय शामिल हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- 56.83 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीयन किया गया है।
- 3.48 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला।
- कल्याणकारी योजनाओं पर 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
- निर्माण श्रमिक आवास सहायता डेढ़ लाख रुपये हुई।
- महिला श्रमिकों के लिए ई-रिक्शा सहायता भी बढ़ी।
- डिजिटल माध्यम से पंजीयन और रोजगार सेवाएं आसान हुईं।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा हुआ व्यापक
राज्य में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए विभिन्न मंडलों के माध्यम से योजनाएं संचालित हैं। इनके तहत संगठित, निर्माण और असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। अब तक करीब 56.83 लाख श्रमिक इन व्यवस्थाओं से जुड़े हैं।
वर्ष 2026 में 30 जून तक 3.48 लाख श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिला। इनमें बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन योजनाओं पर करीब 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
आवास और स्वरोजगार पर बढ़ा जोर
निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत राशि बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये की गई है। इससे पात्र श्रमिकों को घर बनाने या खरीदने में मदद मिलेगी।
महिला निर्माण श्रमिकों के लिए भी स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए गए हैं। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना में राशि एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये की गई है। इससे महिलाओं को आय का स्थायी साधन विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
श्रमिक सशक्तिकरण में शिक्षा और स्वास्थ्य की अहम भूमिका
श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा को लेकर नई योजनाएं शुरू की गई हैं। अटल कैरियर निर्माण योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग का प्रावधान है।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र बच्चों को आवासीय विद्यालयों में शिक्षा दी जा रही है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2026-27 से लाभार्थी बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पहल की गई है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के तहत नियमित स्वास्थ्य जांच होगी। इससे बीमारियों की पहचान समय रहते करने में मदद मिलेगी।
पांच रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना श्रमिकों के लिए उपयोगी सुविधा है। इसके तहत केवल पांच रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।
यह सुविधा पंजीकृत निर्माण, संगठित और असंगठित श्रमिकों को उपलब्ध कराई जा रही है। इससे काम के दौरान भोजन की सुविधा सुलभ और किफायती बनी है।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी सुविधा
श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल ऐप डिजिटल सेवाओं को सरल बनाने में मदद कर रहा है। इसके जरिए श्रमिक स्वयं पंजीयन कर सकते हैं। नियोजकों और श्रमिकों के बीच संपर्क की सुविधा भी उपलब्ध है।
रोजगार से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इससे सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ समय की बचत भी होती है।
श्रमिक सशक्तिकरण को सुरक्षित कार्यस्थल से मजबूती
राज्य सरकार श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रही है। विभिन्न कारखानों में नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा अधिकारी कार्य के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
इससे सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही कार्यस्थल दुर्घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
मॉडल लेबर चौक में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
श्रमिकों के लिए मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। यहां पंजीयन और योजनाओं के आवेदन की सुविधा होगी। इसके अलावा भोजन, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन केंद्रों का उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर और सम्मानजनक वातावरण देना है। इससे रोजाना रोजगार की तलाश करने वाले श्रमिकों को सुविधा मिल सकती है।
एक नजर में
- श्रम विभाग के प्रशासनिक ढांचे का विस्तार हुआ।
- पांच श्रम पदाधिकारी कार्यालय उन्नत किए गए।
- महिलाओं के रोजगार अवसरों को बढ़ाने के लिए नियम बदले गए।
- श्रमिक पहचान पंजीयन की प्रक्रिया को तेज किया गया।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाया गया।
- कार्यस्थल सुरक्षा प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी गई।
सामाजिक सुरक्षा में आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत विभिन्न परिस्थितियों में सहायता दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये मिलते हैं। कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर पांच लाख रुपये की सहायता है।
स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक सहायता दी जाती है। वहीं अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की दुर्घटना में मृत्यु पर भी सहायता का प्रावधान है।
असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत भी आर्थिक सहायता दी जाती है। पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये मिलते हैं। दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है।
कुल मिलाकर, राज्य में श्रमिक सशक्तिकरण को कई क्षेत्रों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। सुरक्षा और सामाजिक सहायता के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता मिली है। आवास और स्वरोजगार योजनाएं आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं।
डिजिटल सेवाओं से प्रशासन और श्रमिकों के बीच संपर्क आसान हुआ है। वहीं मॉडल लेबर चौक जैसी पहलें बेहतर कार्य वातावरण की दिशा में कदम हैं। इन प्रयासों से श्रमिकों को विकास प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भागीदारी का अवसर मिल रहा है।
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