भारत में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण जारी है। SIR मतदाता सूची 2026 को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल ड्राफ्ट रोल में घटे नामों की संख्या को लेकर है। सितंबर 2026 तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम घटने की रिपोर्ट है। हालांकि, ड्राफ्ट में नाम नहीं होना अंतिम विलोपन नहीं है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसमें पात्र मतदाता को शामिल रखना जरूरी है। साथ ही अपात्र और गलत प्रविष्टियों को हटाया जाता है। तीसरे चरण में 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इस चरण में 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन होना था।
SIR मतदाता सूची 2026 में सबसे ज्यादा बदलाव कहां हुआ?
उपलब्ध आंकड़ों में दिल्ली और महाराष्ट्र में बड़ा बदलाव दिखा है। दिल्ली की पुरानी सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट रोल में यह संख्या करीब 97.53 लाख रह गई। यानी करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं रहे।
महाराष्ट्र में भी आंकड़ा काफी बड़ा है। SIR से पहले करीब 9.78 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट रोल में करीब 7.71 करोड़ नाम शामिल हुए। करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं थे।
हालांकि, दोनों राज्यों में यह अंतिम विलोपन का आंकड़ा नहीं है। मतदाताओं को दावा और आपत्ति का अवसर दिया गया है। इसलिए अंतिम सूची में बदलाव संभव है।
SIR मतदाता सूची 2026 के आंकड़े कैसे समझें?
ड्राफ्ट रोल में नाम घटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें मृत्यु और स्थायी स्थानांतरण शामिल हैं। अनुपस्थित मतदाता भी एक कारण हो सकता है। इसके अलावा डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जाती है।
महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ ऐसे फॉर्म बताए गए हैं। इन फॉर्मों को अलग-अलग कारणों से एकत्र नहीं किया जा सका। इनमें मृत, स्थानांतरित और नहीं मिले मतदाता शामिल थे।
इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने को अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए नाम शामिल करा सकता है।
किन राज्यों में SIR पूरा हुआ और कहां जारी है?
SIR को अलग-अलग चरणों में लागू किया गया है। बिहार में पहला चरण जून से सितंबर 2025 तक चला। इसके बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और मध्य प्रदेश शामिल थे।
तीसरे चरण की शुरुआत मई 2026 में हुई। इसमें 16 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए। आयोग ने इसके लिए अलग-अलग राज्यों का कार्यक्रम तय किया है।
ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में तीसरे चरण की गणना प्रक्रिया मई 2026 में शुरू हुई थी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में क्या स्थिति है?
दिल्ली में ड्राफ्ट रोल से करीब 47.7 लाख नाम बाहर हुए हैं। दावा दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। संबंधित मतदाता दस्तावेजों के साथ अपना दावा दे सकते हैं।
महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं थे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसे स्थायी रूप से हटे मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में पात्र मतदाताओं के लिए दावा दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर बताई गई थी। इसके बाद दावों की जांच और निपटारा किया जाना है।
एसआईआर को लेकर क्या विवाद है?
SIR को लेकर राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ दलों ने सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पात्र मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग प्रक्रिया को मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जोड़ता है। आयोग का घोषित उद्देश्य पात्र नागरिकों को शामिल करना है। साथ ही अपात्र प्रविष्टियों को हटाना भी इसका हिस्सा है।
दिल्ली में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को लेकर भी बहस हुई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस मिले हैं। ऐसे नोटिस सत्यापन से जुड़े कारणों के आधार पर भेजे गए।
इसलिए SIR मतदाता सूची 2026 के आंकड़ों को समझते समय ड्राफ्ट और अंतिम सूची में अंतर जरूरी है।
मतदाताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- सबसे पहले ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जांचें।
- नाम नहीं मिलने पर हटने का कारण देखें।
- निर्धारित समय में दावा या आपत्ति दर्ज करें।
- जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज जमा करें।
- अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक स्थिति जांचते रहें।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
- चुनाव अधिकारी दावों और आपत्तियों की जांच करेंगे।
- पात्र मतदाताओं के नाम फिर सूची में शामिल हो सकते हैं।
- गलत या अपात्र प्रविष्टियों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
- इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
- अंतिम सूची से वास्तविक बदलाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर, SIR मतदाता सूची 2026 में बड़े स्तर पर बदलाव सामने आए हैं। सितंबर 2026 तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट रोल में कम हुए हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट से बाहर हुए।
हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम विलोपन नहीं माना जा सकता। दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के बाद स्थिति बदल सकती है। इसलिए अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
यह भी पढ़े: जेलेंस्की यूएन बयान: भारत समेत 47 देशों का जिक्र, रूस पर गंभीर आरोप