रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी के जरिए लोगों से जुड़े। लोकवाणी की 23वीं कड़ी में उन्होंने ’’उद्यमिता और जनसशक्तिकरण का छत्तीसगढ़ मॉडल’’ विषय पर प्रदेशवासियों से चर्चा की। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन के अवसर पर प्रसारित इस कड़ी की शुरूआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित नेहरू को बच्चों से बहुत प्यार था। पंडित नेहरू का जन्म दिवस बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहकर पुकारते हैं। वे देश की नई पीढ़ी को अपने विश्वास की छत्रछाया में पनपते देखना चाहते थे। पंडित नेहरू को नई पीढ़ी पर अटूट भरोसा था।

मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं चाहूंगा कि आप लोग पंडित नेहरू की जीवनी और उनके कार्यों के बारे में पढ़ें, जानें और उन्हें अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें। पंडित नेहरू ने नए और आधुनिक भारत की नींव रखी। उन्होंने भारी कल-कारखानों, बांध, विज्ञान और तकनीक की शिक्षा के लिए आधुनिक संस्थानों की स्थापना की। आज इन्हीं संस्थाओं में हमारे देश के नौनिहालों का भविष्य संवर रहा है और देश समेत दुनिया को बड़े-बड़े डॉक्टर, इंजीनियर और विशेषज्ञ मिल रहे हैं।

मजबूत आजिविका और आर्थिक विकास है विकास का पैमाना

मुख्यमंत्री का मानना है कि आजीविका को मजबूत करने और जनता के हाथों में स्वाभिमान से लेकर आर्थिक ताकत सौंपने की जो रणनीति उनकी सरकार ने अपनाई है वही छत्तीसगढ़ मॉडल के रूप में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है। सीएम की ये सोच शत प्रतिशत आज जमीनी स्तर पर देखने को भी मिल रही है। उन्होंने न सिर्फ कहा बल्कि किया भी। दिखावटी विकास की दौड़ से अपने आपको अलग रखते हुए भूपेश सरकार ने बुनियादी बातों पर ध्यान दिया। जिससे प्रदेश में आजीविका और जीवन स्तर उन्नयन के स्थाई साधनों का निर्माण हो रहा है। शुरुआती मंदी का समय रहा हो या बाद में कोविड के लॉकडाउन का संकट, सरकार ने अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं से किसानों, वन आश्रितों, मजदूरों, महिला समूहों और युवाओं की जेब में जो 80 हजार करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से डाले। उस राशि को हमारे भाइयों-बहनों और युवा साथियों ने तिजोरी में बंद करके नहीं रखा बल्कि उससे नए-नए काम किए, अपनी जरूरत की खरीदी की। इस तरह प्रदेश की जनता ने मिलकर राज्य की अर्थव्यवस्था की तरलता को बनाए रखा। इस तरह से प्रदेश में नए-नए तरह के काम-धंधे भी चले और परंपरागत कौशल, परंपरागत रोजगार के अवसरों को नई दिशा भी मिली।

छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र में हो रहा नवाचार

लोकवाणी में सीएम भूपेश ने स्थानीय स्तर पर लोगों को आजीविका और रोजगार के नए-नए अवसर पैदा करने के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि बंद पड़ी खदान असुरक्षित होती हैं। स्थानीय मछुआरों के समूहों से चर्चा कर इसके बेहतर उपयोग की संभावनाएं तलाशी गई। आज केनापारा की बंद खदान में मछली पालन, रेस्टोरेंट संचालन के साथ ही लाइफ गार्ड जैसे अनेक रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। यह खदान अब पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय हो गई है। सूरजपुर जिले का महामाया महिला समूह डेयरी व्यवसाय से जुड़ गया है। मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मेट का काम कर रही बहनों की सराहना करते हुए कहा कि आपकी दृढ़ इच्छा-शक्ति के कारण आपके गांव में स्थाई महत्व के काम भी हो रहे हैं।

गांवों से गुजरता है समृद्धि का रास्ता

गांधी जी ने गांव को समृद्ध करने का सपना देखा था। क्योंकि उनका मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। यदि यहां के गांव समृद्ध हो जाएं तो भारत खुद ब खुद सशक्त और समृद्ध हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने भी गांधी जी के इस विचार को आत्मसात करने का प्रयास किया। उनका मानना है कि गांव खुशहाल होंगे तभी शहर में समृद्धि आएगी। छत्तीसगढ़ के विकास का यही रास्ता है। छत्तीसगढ़ मॉडल की सफलता का यही पैमाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विकास के परम्परागत मॉडल, पंडित नेहरू के आधुनिक मॉडल, इंदिरा गांधी के दृढ़ इच्छाशक्ति के मॉडल और राजीव गांधी के टैक्नोलॉजी से बदलाव के मॉडल के प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी की तस्वीर बदलने, गांवों में नए संसाधनों से, नई तकनीक से खेती करने और परंपरागत आजीविका में सुधार की जो पहल की गई उनको सफलता मिली।