600 करोड़ में बेचने की तैयारी

निजीकरण का दुष्परिणाम झेलेगा देश !

रायपुर। रायपुर रेलवे स्टेशन को निजी हाथों में देने की तैयारी चल रही है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रेलवे के जिन सेक्टरों को निजी हाथों में देने की घोषणा की गई है, उनमें देश के 200 स्टेशनों में रायपुर रेलवे स्टेशन भी शामिल है। रेलवे बोर्ड की सूची में रायपुर स्टेशन ए-वन श्रेणी में दर्ज है। ऐसे में छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रदेशों के बड़े उद्योगपति, कारोबारी इस स्टेशन को 600 करोड़ रुपये में खरीदने के लिए लगातार रेल मंडल कार्यालय पहुंच रहे हैं। यहां पर कारोबारियों को रेलवे अधिकारी यह बता रहे हैं कि निजीकरण की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है, लिहाजा ऑनलाइन ही आवेदन करें। इस पर अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड ही लेगा।

पिछले 10 सालों में एयरपोर्ट की तर्ज पर लुक और सुविधाओं के विस्तार की कवायद चल रही है। निजी हाथों में देने की सूची में रायपुर एयरपोर्ट भी शामिल है, इसलिए ये माना जा रहा है कि अब रायपुर स्टेशन रेलवे के हाथ से निकलने वाला है। कुल मिलाकर रेलवे के निजीकरण के पहले दौर में सबसे ज्यादा 1.52 लाख करोड़ रुपये रेलवे में हिस्सेदारी बेचकर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

ये होगा निजीकरण के बाद

निजीकरण होने के बाद रेल डिवीजन का स्टेशन में दखल खत्म हो जाएगा। यानी पार्सल, पार्किंग, टिकट बुकिंग काउंटर, खानपान स्टॉल, कैंटीन, वेटिंग हॉल, मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स समेत सब कुछ निजी ठेकेदारों के हाथ में चला जाएगा।

यात्रियों को झेलना पड़ेगा निजीकरण का दुष्परिणाम

आधुनिकीकरण के नाम पर रेलवे स्टेशनों को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी का विरोध भी हो रहा है। सूत्रों की मानें तो रेलवे स्टेशन निजी हाथों में जाने का मतलब साफ है कि सीधा असर यात्रियों की जेब पर ही पड़ेगा। क्योंकि ठेकेदार अपने तरीके से रेट तय करेगा और दूसरी पार्टियों से ज्यादा रेट लेकर हर चीज को संचालित करेगा। वहीं लोग फिर यात्रियों से मनमानी तरीके से खानपान से लेकर सुविधा शुल्क की वसूली करेंगे, जिस पर रेलवे प्रशासन का कोई दखल नहीं होगा।

हर साल 500-550 करोड़ की आय

ए वन श्रेणी के रायपुर रेलवे स्टेशन से रेलवे को अलग-अलग स्रोतों से करीब 500 से 550 करोड़ का राजस्व हर साल मिलता है। जिसका दायरा लगातार बढ़ा है। रेलवे अफसरों का कहना है कि भारतीय रेलवे में बिलासपुर रेल जोन राजस्व देने के मामले में छंठे नंबर पर है। यह कभी घाटे में नहीं रहा है।