रोज़ 10,000 कदम का लक्ष्य बहुत लोगों के लिए मुश्किल होता है. दफ्तर, घर और सफर के बीच इतना चलना आसान नहीं. अब ब्रिटेन के एक लाख से ज़्यादा लोगों के डेटा पर हुई स्टडी तेज़ चलने के फायदे पर नई जानकारी देती है. यह रिसर्च British Journal of Sports Medicine में सितंबर 2026 में छपी है. ध्यान रहे, यह ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी है, यानी इससे जुड़ाव दिखता है, सीधा कारण साबित नहीं होता.
कम कदम पर तेज़ चलने के फायदे कितने दिखे
रोज़ 5,000 से कम कदम चलने वालों की चाल अगर 80 कदम प्रति मिनट से तेज़ थी, तो उनमें मौत का जोखिम कम मिला. यह कमी धीमी चाल से 5,000 से 7,500 कदम चलने वालों जितनी थी. फिर भी सबसे कम जोखिम 7,500 से 10,000 कदम वालों में दिखा.
वॉकिंग स्टडी की अहम बातें एक नज़र में
- डेटा: UK बायोबैंक के 1,03,684 लोग, जिन्होंने सात दिन कलाई पर एक्टिविटी ट्रैकर पहना.
- निगरानी: करीब आठ साल तक मौतों का रिकॉर्ड देखा गया.
- पैमाना: दिन के सबसे तेज़ 30 मिनट की औसत रफ्तार, जिसे ‘पीक-30 कैडेंस’ कहा गया.
- सबसे कम जोखिम: रोज़ 7,500 से 10,000 कदम, वह भी तेज़ रफ्तार के साथ.
- सीमा: स्टडी ऑब्ज़र्वेशनल है, इसलिए नतीजे कारण नहीं, संबंध बताते हैं.
स्टडी में किसे और कैसे परखा गया
दरअसल ये प्रतिभागी 2006 से 2010 के बीच 40 से 69 साल की उम्र में UK बायोबैंक से जुड़े थे. इसके बाद 2013 से 2015 के बीच उन्होंने एक हफ्ते तक ट्रैकर पहना. सभी कारणों से मौत वाले विश्लेषण में 64,743 लोग शामिल हुए और 1,697 मौतें दर्ज हुईं. साथ ही इस समूह में औसत उम्र करीब 61 साल थी और 58% महिलाएं थीं.
वहीं दिल की बीमारी से मौत वाले हिस्से में 70,075 लोग थे और 502 मौतें दर्ज हुईं. फिर कदमों को चार समूहों में बांटा गया. ये थे 5,000 से कम, 5,000 से 7,500, 7,500 से 10,000 और 10,000 से ज़्यादा.
तेज़ चलने के फायदे किन लोगों के लिए खास हैं
सबसे पहले उन लोगों के लिए, जिनके पास लंबी सैर का समय नहीं है. उदाहरण के लिए नौकरीपेशा लोग, छोटे बच्चों के माता-पिता या रोज़ लंबा सफर करने वाले. स्टडी का संकेत है कि कम कदम में भी रफ्तार अहम हो सकती है.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि ज़्यादा कदम बेकार हैं. स्टडी के मुताबिक कदमों की संख्या और रफ्तार, दोनों का अपना महत्व है. यानी जो ज़्यादा चल सकते हैं, उनके लिए तेज़ चाल के साथ 7,500 से 10,000 कदम बेहतर विकल्प दिखते हैं.
अपनी चाल की रफ्तार घर पर कैसे नापें
अगर आपके पास फिटनेस बैंड नहीं है, तो भी चाल की रफ्तार का अंदाज़ा लगाया जा सकता है:
- मोबाइल में एक मिनट का टाइमर लगाएं और आम रफ्तार से चलें.
- इस दौरान हर कदम गिनें, दोनों पैरों के कदम मिलाकर.
- 80 से ज़्यादा कदम आएं तो आपकी चाल तेज़ श्रेणी में मानी जा सकती है.
- बात करते हुए सांस थोड़ी फूले, पर बोल पाएं, तो यह मध्यम तेज़ी का आम संकेत है.
इसके अलावा हेल्थ वेबसाइट News-Medical पर छपी स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 कदम प्रति मिनट पर हर समूह में कम जोखिम का अनुमान दिखा. फिर भी रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम नहीं.
रोज़ के रूटीन में तेज़ वॉक कैसे जोड़ें
- सुबह या शाम 10-10 मिनट के दो-तीन तेज़ सेशन रखें.
- बाज़ार या दफ्तर की छोटी दूरी पैदल और तेज़ कदमों से तय करें.
- सीढ़ियां चढ़ें, पर घुटनों में दर्द हो तो रुकें.
- तेज़ बीट वाला गाना कदमों की लय बनाए रखने में मदद कर सकता है.
- आखिर में, वॉक के बाद कुछ मिनट धीमे चलकर शरीर को सामान्य होने दें.
साथ ही याद रखें कि तेज़ चलने के फायदे तभी टिकते हैं जब यह आदत रोज़ की बन जाए. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वयस्कों को हर हफ्ते 150 से 300 मिनट मध्यम शारीरिक गतिविधि की सलाह देता है. तेज़ वॉक इसका आसान हिस्सा बन सकती है.
तेज़ चलने के फायदे पर स्टडी की सीमाएं
इस रिसर्च को पढ़ते वक्त कुछ बातें याद रखें. सबसे पहले, यह ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी है. मुमकिन है कि तेज़ चलने वाले पहले से ज़्यादा सेहतमंद हों. दूसरी बात, ट्रैकर सिर्फ एक हफ्ता पहना गया था. आखिर में, कलाई वाला ट्रैकर कभी हाथ की हरकत को कदम गिन लेता है और कभी असली कदम छोड़ देता है.
तेज़ चलने के फायदे पर पाठकों के सवाल
क्या दिल के मरीज भी तेज़ चल सकते हैं?
ऐसे लोगों को पहले अपने डॉक्टर से पूछना चाहिए. डॉक्टर ही बता सकते हैं कि उनके लिए कितनी रफ्तार सुरक्षित है.
क्या भारतीय लोगों पर भी यही नतीजे लागू होंगे?
फिलहाल पक्का नहीं कहा जा सकता. डेटा ब्रिटेन के मध्यम उम्र वाले लोगों का है. इसलिए भारतीय आबादी पर अलग रिसर्च ज़रूरी है.
डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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