रायपुर। भूपेश सरकार अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा करने वाली है। इन तीन साल में इस छत्तीसगढ़िया सरकार ने नई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। चाहे वह गरीबों, किसानों, आदिवासियों की बात हो या आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास की बात हो, इन सभी परिदृश्यों में प्रदेश ने देश भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। सुशासन के इन 36 महीनों में छत्तीसगढ़ एक मॉडल बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विकास मॉडल में उनकी प्राथमिकता में छत्तीसगढ़ के लोग हैं। तीन साल के कार्यकाल में भूपेश सरकार का यही प्रयास रहा है कि वे हर व्यक्ति की जेब में पैसा डाल सकें। उनकी क्रय शक्ति बढ़ा सकें, जिससे बाजार और उद्योग को बल मिले। भूपेश सरकार के विकास का पैमाना राज्य के हर व्यक्ति का समावेशी विकास है।

गोबर खरीदी की चर्चा

विकास के दो पैमाने होते हैं, पहला कांक्रीट और डामर का काम और दूसरा राज्य के निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाना है। स्वास्थ्य, शिक्षा का मूलभूत सुविधाओं में आधुनिक वृद्धि करना भूपेश सरकार के केंद्र में है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, भूमिहीन मजदूर न्याय योजना के जरिए भूपेश सरकार सभी वर्गों के न्याय के लिए काम कर रही है। आज पूरी दुनिया में गोधन न्याय योजना की चर्चा हो रही है। लोग इस बात से हैरत में है कि किस तरह गोबर की खरीदी की जा सकती थी। प्रदेश सरकार ने न सिर्फ गोबर की खरीदी की बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत भी बनाया।

गोबर से खाद बनाती महिलाएं

केंद्र की अड़चनों के बाद भी अडिग रही भूपेश सरकार

तीन सालों में जनता ने देखा है कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग की सरकार है। कांग्रेस ने किसानों से उनकी लागत का उचित मूल्य देने का वादा किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर धान खरीदी पर अंकुश लगाया। ऐसी स्थिति में भी भूपेश सरकार अपने कहे पर टीकी रही और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए किसानों को राहत पहुंचाने के लिए अपने किए गए वादे अनुसार उन्हें भुगतान किया जा रहा है।

वनोपज खरीदी को प्रोत्साहन

सरकार ने आदिवासियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए 52 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर शुरू की, जो कि पहले महज 7 थी। साथ ही वनोपज में वैल्यू एडिशन भी किया। कोदो-कुटकी, रागी, राहर, मक्का और गन्ना सभी फसलों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना से जोड़ा। किसानों को समृद्ध करने के लिए भूपेश सरकार लगातार काम कर रही है। सीएम बघेल का कहना है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधा और समय के साथ आने वाली समस्याओं का निदान ढूंढना सरकार की जिम्मेदारी है।

वनोपज संग्रहण

घोषणा पत्र के अलावा भी किए कई काम

अपने कार्यकाल के दौरान भूपेश सरकार अपने घोषणा पत्र के वादे तो पूरे कर ही रही है, साथ ही इसके अलावा भी ऐसे काम कर रही है जिससे आम आदमी के जीवन में परिर्वतन आए। इस सरकार ने हर योजना के पीछे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की नीति अपनाई। राज्य में सफाई कार्य को भी अर्थव्यवस्था से जोड़ा, जिसका नतीजा ये रहा कि छत्तीसगढ़ को स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार तीन बार पुरस्कार मिले।

74 प्रतिशत वनोपज की खरीदी

कोरोना संकटकाल में कहीं भी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा था। उस वक्त भूपेश बघेल सरकार ने राज्य के 26 लाख परिवारों को मनरेगा के तहत काम दिया। आदिवासी क्षेत्रों में इमली और महुआ की खरीदी की। देशभर में 74 प्रतिशत लघु वनोपज की खरीदी इकलौते छत्तीसगढ़ ने की है। सीएम का कहना है कि छत्तीसगढ़ में चाहे व्यापारी वर्ग हो, किसान, मजदूर समेत सभी वर्ग हमारी सरकार से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री आवास की योजना राज्य में बंद नहीं किया है। केंद्र जब अपना हिस्सा राज्य को दे देगा तब इस योजना को तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों का आर्थिक विकास

इमली से बीज निकालते संग्राहक

भूपेश सरकार अब ग्रामीण छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सी-मार्ट की स्थापना कर रही है। जहां ग्रामीण स्तर पर बनने वाले हर उत्पाद मिलेंगे और एक ही छत के नीचे लोग सभी प्रकार के ग्रामीण उत्पाद खरीद सकेंगे। हर ग्राम पंचायत के गौठान में स्व-सहायता समूह के लोगों और स्थानीय कारीगरों के लिए ट्रेनिंग, रोजगार और विक्रय सुविधा मुहैया कराई जाएगी। सीएम भूपेश की मंशा है कि आने आगामी दो साल में छत्तीसगढ़ियों की ये सरकार और बेहतर और सशक्त छत्तीसगढ़ बनाने की ओर प्रयासशील रहेगी।