स्वास्थ्य को लेकर लोगों में बढ़ी रही चेतना

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों एवं महिलाओं में कुपोषण और रक्त अल्पता (एनीमिया) की समस्या दूर करने के लिए सामाजिक क्रांति की जरूरत है। कुपोषण से सुपोषण की यात्रा को जनमानस का मुद्दा बनाकर ही सुपोषित छत्तीसगढ़ की अवधारणा को सफल बनाए जाने पर सरकार जोर दे रही है। शासन के अन्य विभागों को इससे जोड़कर आम लोगों के बीच पहुंचाने पर बल दिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की कुपोषण और रक्त अल्पतता के खिलाफ जारी लड़ाई में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर राज्य सरकार का जोर है। इसके आशाजनक परिणाम भी नजर आ रहे हैं। बस्तर जैसे क्षेत्र में एक समय ऐसा भी था जब ग्रामीण जब तक बीमारी की स्थिति गंभीर नहीं हो जाती थी अस्पताल लेकर नहीं आते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। लोगों में स्वास्थ्य को लेकर चेतना बढ़ी है।

यह बात महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा सुपोषित छत्तीसगढ़ परिदृश्य एवं चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी की आयोजन बस्तर में किया गया था। संगोष्ठी में यह बात निकलकर सामने आई है कि जनमानस के बीच इसे पहुंचाने पर लोगों में इसके प्रति जागरूकता आएगी। विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि कुपोषण एवं रक्त अल्पतता एक गंभीर समस्या है। इसे दूर करना उतना ही चुनौतीपूर्ण कार्य है। बस्तर जैसे सुदूर दुर्गम क्षेत्रों में भौगोलिक एवं अन्य कारणों से यह कार्य और भी कठिन हो जाता है। इन सब चुनौतियों को समझकर विभाग कई दूसरे विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, पंचायत पदाधिकारियों आदि की सहयता से कुपोषण से सुपोषण की यात्रा को जनमानस का मुद्दा बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसका फायदा भी मिला है।

लोग खुद आ रहे आगे

ग्रामीण क्षेत्र में लोगों में कुपोषण और रक्ताल्पता की समस्या को लेकर जागरूकता बढ़ी है। लोग स्वयं आगे आकर आंगनबाड़ी केंद्रों, अस्पतालों से जुड़कर विभागीय योजनाओं, सेवाओं, कार्यक्रमों का लाभ लेने लगे हैं। यह समस्या लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है और सरकारी अमले के साथ मिलकर लोग खुद समस्या के निदान के लिए प्रयास कर रह रहे हैं। यह भी सफलता का संकेेत है। पोषण वाटिका, पोषण आहार, आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित होने वाली गतिविधियों, जिला प्रशासन के द्वारा किए जाने वाले प्रयासों से कुपोषण से सुपोषण की यात्रा में जनभागीदारी दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

आंगनबाड़ी केंद्र में समर्पण से हो रहा काम

बस्तर के गांवों में सबसे अधिक यदि किसी संस्थान की चर्चा होती है तो वह आंगनबाड़ी केंद्र है। कार्यकर्ता समर्पण भाव से काम करती हैं तभी लोगों के बीच आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर ऐसी धारणा बनी है। कुपोषण और रक्त अल्पतता की समस्या की गंभीरता को समाज के हर व्यक्ति को समझना चाहिए। जब लोग समस्या को समाप्त करने को लेकर गंभीर होंगे तो अभियान की सफलता तय है। महिलाएं परिवार की अधिकांश जिम्मेदारी खुद लेती हैं इसका प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। जिम्मेदारियों का बंटवारा होना चाहिए इससे महिला और बच्चे दोनों स्वस्थ्य होंगे। सुपोषण अभियान को सामाजिक क्रांति के रूप में आगे बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।