वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिकी शिक्षा विभाग को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। यह निर्णय अमेरिका में लंबे समय से चली आ रही उस बहस का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा प्रणाली को राज्यों के अधिकार क्षेत्र में लाने की मांग की जाती रही है।
शिक्षा विभाग को क्यों खत्म किया जा रहा है?
ट्रंप ने कहा, “हम इसे पूरी तरह बंद करने जा रहे हैं। यह हमारे किसी काम का नहीं है। हम शिक्षा को वापस राज्यों को सौंपेंगे, जहां इसे होना चाहिए।” उनके इस फैसले से अमेरिका की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आ सकता है।
कांग्रेस की मंजूरी जरूरी
अमेरिका में शिक्षा विभाग 1979 में स्थापित किया गया था और इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी। हालांकि, ट्रंप के इस आदेश से शिक्षा विभाग को मिलने वाले फंड और स्टाफ की कटौती शुरू हो सकती है। इससे शिक्षा नीतियों में व्यापक परिवर्तन संभव हो सकता है।
एलन मस्क की भूमिका
ट्रंप का यह फैसला उनकी चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले को लागू करने में टेक टायकून एलन मस्क भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
डेमोक्रेट्स और शिक्षाविदों का विरोध
डेमोक्रेटिक पार्टी और शिक्षाविदों ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है। सीनेट के शीर्ष डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने इसे “तानाशाही की कोशिश” और “अब तक का सबसे विनाशकारी निर्णय” करार दिया।
रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन
ट्रंप के इस आदेश पर कई रिपब्लिकन नेताओं ने समर्थन जताया। इस मौके पर फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस और टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट भी मौजूद थे।
शिक्षा प्रणाली में क्या बदलाव होंगे?
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि शिक्षा विभाग को खत्म करने से अमेरिका की शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका की शिक्षा प्रणाली यूरोप और चीन के मुकाबले पिछड़ रही है, इसलिए इसे सुधारने की जरूरत है।
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