लद्दाख और कश्मीर के बीच सालभर सड़क संपर्क सुनिश्चित करने वाली महत्वाकांक्षी जोजिला टनल परियोजना ने एक अहम मुकाम हासिल कर लिया है। सुरंग के भीतर अंतिम चट्टानी अवरोध को सफलतापूर्वक हटाने के बाद दोनों छोर आपस में जुड़ गए हैं। इस उपलब्धि को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पहाड़ों के बीच इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना
करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही जोजिला टनल अत्याधुनिक तकनीकों से तैयार की जा रही है। यह सुरंग कठिन हिमालयी भूभाग को पार करते हुए कश्मीर घाटी को सीधे लद्दाख क्षेत्र से जोड़ेगी। परियोजना के पूरा होने के बाद देश को विश्व स्तरीय परिवहन सुविधा प्राप्त होगी।
यात्रियों के लिए समय और जोखिम दोनों होंगे कम
फिलहाल बर्फबारी और खराब मौसम के कारण जोजिला दर्रे को पार करना चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन जोजिला टनल शुरू होने के बाद एक घंटे से अधिक समय लेने वाला सफर केवल 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को सुरक्षित और तेज आवागमन की सुविधा मिलेगी।
व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय व्यापारियों और किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर आवाजाही का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जोजिला टनल लद्दाख और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सीमा क्षेत्रों तक पहुंच होगी और मजबूत
यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। सुरंग के चालू होने के बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों की सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच अधिक तेज और आसान हो जाएगी। जोजिला टनल के कारण हर मौसम में आवश्यक संसाधनों और रसद की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रखी जा सकेगी।
2028 तक शुरू होने की उम्मीद
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अब सुरंग के भीतर फिनिशिंग, विद्युत व्यवस्था और सुरक्षा प्रणालियों का कार्य पूरा किया जाएगा। यदि निर्माण कार्य निर्धारित गति से चलता रहा तो वर्ष 2028 की शुरुआत में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद श्रीनगर और लद्दाख के बीच यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो जाएगी।
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