हर साल मिलेंगे 6 हजार, जानिए कौन पात्र कौन अपात्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाओं की श्रृंखला में एक और योजना राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना देवउठनी त्योहार से शुुरु होगी। योजना में केवल और केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को ही शामिल किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सभी मूल निवासी भूमिहीन कृषि मजदूर, परिवार इस योजना के लिए पात्र होंगे जिनके पास कृषि भूमि नहीं है। लेकिन पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि जैसे वन अधिकार प्रमाण पत्र को भी कृषि भूमि माना जाएगा।
राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस योजना का खाका तैयार किया है। योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी कलेक्टरों को दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। योजना को लाने के पीछे सरकार का मानना है, छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि मजदूरी पर निर्भर है। मजदूरों को खरीफ सीजन में ही मजदूरी का पर्याप्त काम मिल पाता है। कृषि मजदूरी करने वाले अधिकतर लघु सीमांत या भूमिहीन कृषक हैं। इसमें से भूमिहीन कृषि मजदूरों को अन्य की अपेक्षा रोजगार के अवसर कम मिलते हैं। इन्हीं वर्ग के लोगों को लाभ पंहुचाने के लिए यह योजना इसी वित्तीय वर्ष से लागू की जा रही है।
हर साल मिलेगा 6 हजार रुपए
योजना के हितग्राहियों को सरकार साल में 6 हजार रुपए देगी। सरकार का मानना है, आर्थिक अनुदान के माध्यम से भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी। योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू होगी। राज्य स्तर पर योजना का संचालन आयुक्त-संचालक भू-अभिलेख, तथा जिला स्तर पर कलेक्टर की देखरेख में होगा। योजना की पात्रता 1 अप्रैल 2021 से मानी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे सभी मूल निवासी भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र होंगे, जिस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है। पट्टे पर प्राप्त शासकीय भूमि यथा-वन अधिकार प्रमाण पत्र को कृषि भूमि माना जाएगा।
ये होंगे पात्र
ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे-पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा शासन द्वारा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र होंगे। यदि उस परिवार के पास कृषि भूमि नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि भूमिहीन कृषि मजदूर मतलब ऐसा व्यक्ति जो कोई कृषि भूमि धारण नहीं करता और जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है और उसके परिवार का जिसका कि वह सदस्य है, कोई सदस्य किसी कृषि भूमि को धारण नहीं करता है। हितग्राही भूमिहीन है या नहीं इस बात की पुष्टि भुईयां पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। कृषि भूमि धारण नहीं करना, से आशय है उस परिवार के पास अंश मात्र भी कृषि भूमि नहीं होना है। कृषि भूमिहीन परिवारों की सूची में से परिवार के मुखिया के माता या पिता के नाम से यदि कृषि भूमि धारित है अर्थात उस परिवार को उत्तराधिकार हक में भूमि प्राप्त करने की स्थिति होगी, तब वह परिवार भूमिहीन परिवार की सूची से पृथक हो जाएगा।
मकान की जमीन नहीं मानी जाएगी कृषि भूमि
आवासीय प्रयोजन हेतु धारित भूमि, कृषि भूमि नहीं मानी जाएगी। पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाने पर उक्त परिवार के ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के मुखिया को अनुदान सहायता राशि प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र के साथ “राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना” पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अपंजीकृत परिवारों को योजनांतर्गत अनुदान की पात्रता नहीं होगी।
गलत पंजीयन कराने पर होगी कार्रवाई
यदि पंजीकृत हितग्राही परिवार के मुखिया के द्वारा असत्य जानकारी के आधार पर अनुदान सहायता राशि प्राप्त की गई हो, तब विधिक कार्यवाही करते हुए उक्त राशि उससे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी। यही नहीं नगरीय क्षेत्र में रहने वाले योजना के लिए अपात्र होंगे। जो लोग किसी भी प्रकार का संवैधानिक पद पर काम करने वाले राज्य या केंद्र की किसी संस्था में नियमित या संविदा में काम करने वाले भी अपात्र होंगे। जनपद का कोई वर्तमान या पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत का वर्तमान या पूर्व सदस्य, ग्राम पंचायत का कोई भी वर्तमान या पूर्व सरपंच भी योजना के लिए पात्र नहीं हो सकता है।
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