बलौदाबाजार में नगरपालिका परिषद द्वारा 3 मणिकंचन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। तीनों मणिकंचन केंद्र में 58 महिलाएं विभिन्न प्रकार के कार्य कर हर माह 6 हजार रूपये की आय प्राप्त कर रही हैं। यह महिलाएं विभिन्न स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं । इनके द्वारा गोबर की लकड़ी, गोबर के दीये और गोबर खाद बनाने का कार्य किया जा रहा है।

बलौदाबाजार नगर के वार्ड क्रमांक 10 में स्थित मणिकंचन केंद्र की सुपरवाइजर सुनीता साहू ने बताया कि मणिकंचन केंद्र महिलाओं के लिए रोजगार का एक नया जरिया बन गया है। यह कार्य शुरू होने के बाद हम सभी महिलाओं में एक नया हौसला जागृत हुआ और आत्मविश्वास आया।

महिला हुई आत्मनिर्भर / गोबर से बनती है लकड़ी और दिये

महिलाओं का कहना है कि इस कार्य के शुरू होने से कम से कम उनके परिवार के बच्चों का पालन पोषण और शिक्षा का कार्य आसानी से हो रहा है। इसके पहले वह आर्थिक तंगी से गुजर कर बहुत लाचार और बेबस महसूस करती थी। बायो कंपोस्ट जैविक खाद बनाने के लिए महिलाएं इसी वार्ड में स्थित सब्जी बाजार से सब्जियों के अवशेष उठाकर लाती हैं। जिससे जैविक खाद का निर्माण किया जाता है। प्रतिमाह सिर्फ इसी केंद्र में हर दिन 10 क्विंटल खाद का निर्माण किया जा रहा है। आने वाली नवरात्रि पर्व एवं दीपावली को देखते हुए इन महिलाओं द्वारा गोबर के दीये का निर्माण किया जा रहा है। अभी तक इस केंद्र में 1500 गोबर के दीये बनाए जा चुके हैं। यह गोबर के दिए 30 रूपये प्रति दर्जन में बेचे जाते हैं। अभी तक गोबर की लकड़ी तकरीबन 5 क्विंटल बेची जा चुकी है। यह लकड़ी 10 रूपये प्रति किलो में बेची जाती है। तकरीबन 40 क्विंटल गोबर से बनी लकड़ी अभी भी स्टॉक में उपलब्ध है।

प्लास्टिक से मासिक आय अर्जित

गोबर की लकड़ी से भी बड़े पैमाने पर महिलाएं आय अर्जित कर सफलतापूर्वक अपना जीवन यापन कर रही हैं। इसके अलावा भैसा पसरा स्थित समुदाय विशेष की निर्धन गरीब बस्ती के लोग जो पॉलिथीन एवं प्लास्टिक का कचरा बीनने का काम करते हैं, उनके द्वारा भी इस मणिकंचन केंद्र में प्लास्टिक संबंधी वस्तुओं और कचरा एकत्रित कर उनकी छटाई की जाती है और बेचा जाता है। इस विक्रय कार्य मैं तकरीबन 14-15 महिलाएं अपना रोजगार सृजित कर रही हैं। इनके द्वारा लाए गए प्लास्टिक कचरे को मणिकांचन केंद्र में छटाई की जाती है। उसके बाद प्राप्त सभी प्लास्टिक सामग्री सफेद प्लास्टिक, पन्नी, लोहा, टीना प्लास्टिक की बोतल इत्यादि बड़े पैमाने पर इकट्ठा होती है और बिक जाती है। इसके माध्यम से 15 महिलाएं प्रति जोड़ी 6000 रूपये की मासिक आय अर्जित करती हैं। यह सारा कार्य नगर पालिका के मार्गदर्शन में संचालित होता है।

महिलाओं को मिला सहारा

गरीब निर्धन बस्ती की महिलाओं को मणिकंचन केन्द्र से बहुत बड़ा सहारा मिला है। उनके जीवन स्तर में सुधार आया है। मणिकंचन केंद्र में काम करने वाली ज्योति दीपा ने बताया कि वह रिक्शा चलाकर वार्डों से कचरा संकलित करके लाती हैं। इसी के जरिए वे 6000 रूपये प्रति महीने अर्जित कर रही है। पहले इनके पास कोई रोजगार नहीं था। जिसके कारण घर चलाने में भी कठिनाई होती थी। यह रोजगार प्राप्त होने से उनके घर के छोटे मोटे खर्चे निकल जाते हैं। साथ ही काफी अच्छा महसूस कर स्वयं रोजगार प्राप्त करने के बाद उन्हें गर्व महसूस होता है कि वह चार पैसे स्वयं अपने लिए कमा रही हैं। वार्ड क्रमांक 7 की निवासी दिव्यांग 22 वर्षीय रोशनी एवं माया सागर उम्र 30 वर्ष बेरोजगार थी। इन्हें भी मणिकांचन केंद्र में काम मिला।

दिव्यांगों को मिला सहारा

दिव्यांग होने के बावजूद रोशनी पुरैना ने अपने जीवन में गोबर के दीयों का निर्माण कर एक नई रोशनी प्रकाशित की। इन्हें भी प्रतिमाह 6000 रूपये महीने की आय हो रही है। रिक्शा चलाने वाली ठगनी एवं दीपा काफी मेहनत करती हैं और लगातार इनके द्वारा नियमित रूप से प्रतिदिन विभिन्न वार्डों में जाकर कचरा संकलन का कार्य किया जाता है। यह अपनी आय एवं जीवन से संतुष्ट हैं। इसके पहले बेरोजगारी का दंश झेल रही थी एवं परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी । मणिकंचन केंद्र खोलने से नगर की महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है।