महापौर निधि

राज्य सरकार ने महापौर निधि के तहत नगर निगमों के लिए पहली किस्त जारी कर शहरी विकास को नई गति देने की पहल की है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद कुल 104.54 करोड़ रुपये विभिन्न नगरीय निकायों को जारी किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आवश्यक विकास कार्यों को समय पर पूरा कर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

विकास कार्यों में गुणवत्ता पर रहेगा विशेष जोर

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि महापौर निधि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि इस राशि का उपयोग केवल जनहित और मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए किया जाए। इससे शहरी क्षेत्रों में विकास की रफ्तार और तेज होगी।

14 नगर निगमों को मिली पहली किस्त

महापौर निधि के अंतर्गत 14 नगर निगमों को 10 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को भी अध्यक्ष निधि तथा पार्षद निधि की राशि उपलब्ध कराई गई है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली किस्त के रूप में जारी की गई है।

पार्षद निधि से स्थानीय समस्याओं का समाधान

सरकार ने महापौर निधि के साथ पार्षद निधि की पहली किस्त के रूप में 73 करोड़ 38 लाख रुपये भी जारी किए हैं। इससे वार्ड स्तर पर सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य छोटे-बड़े विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। स्थानीय निकायों को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुसार कार्य प्राथमिकता से करने को कहा गया है।

शहरी सुविधाओं को मिलेगा नया विस्तार

महापौर निधि और अन्य निधियों से शहरों में मूलभूत अवसंरचना मजबूत होगी। सरकार का लक्ष्य सभी नगरीय निकायों में विकास कार्यों को गति देकर आम लोगों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभाग लगातार निगरानी भी करेगा।

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