हुक्का बार और गांजे के खिलाफ पुलिस का चला अभियान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हुक्का बार और गांजे से बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए इन पदार्थो पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। दरअसल, गांजा तस्करी का मुख्य कारोबार ओडिया और छत्तीसगढ़ से होते हुए होता है। आए दिन चौपहिया वाहनों में गांजा तस्करी की खबर सामने आती रही है। छत्तीसगढ़ में नशे का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है और युवाओं को अपने चपेट में ले लिया है। राज्य में युवाओं को इस नशे की प्रवृत्ति से रोकने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने हुक्काबार ओर गांजे पर पूरी तरह ासे रोक लगाने और ऐसा करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए है।
मुख्यमंत्री केे निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में ऐसे कारोबार से जूड़े लोगों पर कार्रवाई भी शुरू हो गई।राजधानी के टाटीबंध से लेकर धरसींवा तक अफीम-डोडा के अलावा गांजे की खपत करने वालों का भी बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। यह नेटवर्क आमानाका, कबीर नगर, उरला, खमतराई और धरसींवा थाना क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय है। इसकी बड़ी वजह इन इलाकों में दूसरे राज्य के ट्रकों, भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। इसके अलावा फैक्ट्रियों में काम करने वाले भी बड़ी संख्या में रहते हैं, जो बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा व महाराष्ट्र से आए रहते हैं। इनमें गांजा आसानी से खपत जाता है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस को कोई सफलताएं भी मिली है, लेकिन पत्थलगांव की घटना जिसमें एमपी के गांजा तस्करों की कार ने विसर्जन जुलूस में शामिल लोगों को रौंद दिया था। इस घटना से राजनीति भी गरमा गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया। उनके निर्णय के पीछे युवाओं को इससे निजात दिलाना और नशे का कारोबार करने वालों को बेनकाब करना है।
हिस्ट्रीशीटर करवा रहे हैं गोरखधंधा
गांजा तस्करी और बिक्री के खेल में कई हिस्ट्रीशीटर शामिल हैं। उरला, खमतराई, आमानाका और कबीर नगर इलाके में पुराने हिस्ट्रीशीटर गांजा बिक्री करवा रहे हैं। इसके अलावा शराब की अवैध बिक्री के धंधे में ही इन्हीं का हाथ है। भाजपा सरकार के समय हुक्का बार को लायसेंस भी जारी किया गया था। इसके बाद से प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध हुक्का बार चलाने वालों की बाढ़ आ गई।
युवाओं में बढ़ी नशे की लत
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं में नशे की प्रवृत्ति खतरनाक ढंग से बढ़ी है। विभिन्न रूपों रूपों में नशे के आदि हो चुके युवक उसे प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा पहुंचते हैं। इससे सामाजिक, पारिवारिक समस्याओं के साथ-साथ छिनतई, चोरी, छेड़छाड़, व्यभिचार की समस्याएं सामने आती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी गली-गली शराब की दुकाने व सिगरेट, पान मसाला, गुटाखा आदि सहजता और सुगमता से उपलब्ध हो जाते हैं। ग्रामीण स्तर पर महुए के साथ अन्य रसायन के मिश्रण से तैयार होने वाली देशी शराब सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो जाने से इसके लिए लोगों को भटकना नहीं पड़ता है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों और स्कूली छात्राओं, महिलाओं के बीच भी गुटखा, पान मसाला, धूम्रपान की लत बढऩे लगी है। बेरोजगारी के आलम में मानसिक टूटन के शिकार लोग भी नशे की लत अपनाने लगे हैं।
नशे के कारण विभिन्न रोगों के शिकार
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों युवक नशे की लत के कारण विभिन्न रोगों का शिकार होकर अकाल कलवित हो चुके हैं। दूसरी ओर नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान व सामाजिक संगठनों द्वारा इस प्रवृत्ति की रोक थाम की दिशा में किए जा रहे प्रयास भी अब तक नाकाफी साबित हुए हैं। इस दिशा में नशाबंदी और नशा विमुक्ति को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। चिकित्सकों के अनुसार नशे के रूप में अलकोहल के अत्यधिक सेवन से लीवर स्यानुतंत्र, दृष्टिहीनता की समस्या उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर गुटखा, पान मसाला, कफ सीरफ, सुलेशन के सेवन से मुंह व फेफड़े का कैंसर जान लेवा साबित हो सकता है।
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