ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद भी बीमारी लौट आने का डर कई महिलाओं को सालों तक परेशान करता है. अब वैज्ञानिकों ने इसकी एक बड़ी वजह खोज निकाली है. एक रिसर्च टीम ने ट्यूमर के अंदर की कोशिकाओं का बेहद बारीक नक्शा तैयार किया. इस मैपिंग में सामने आया कि ट्यूमर के अलग-अलग हिस्सों में कोशिकाएं अलग तरह से बर्ताव करती हैं. कुछ कोशिकाएं तेजी से बढ़ती रहती हैं. वहीं कुछ कोशिकाएं सालों तक सोई हुई अवस्था में छिपी रहती हैं. यही सोई हुई कोशिकाएं इलाज के बरसों बाद बीमारी को दोबारा जन्म दे सकती हैं. यह खोज ब्रेस्ट कैंसर दोबारा होने की वजह समझने में डॉक्टरों की बड़ी मदद कर सकती है.
आखिर क्यों लौट आता है कैंसर
डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती एस्ट्रोजन-रिसेप्टर-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर में देर से होने वाला रिलैप्स रहा है. कई बार इलाज के 10 से 15 साल बाद भी बीमारी लौट आती है. मरीज को तब तक पूरी तरह ठीक माना जाता है. अचानक जांच में दोबारा बीमारी सामने आने से डॉक्टर और मरीज दोनों हैरान रह जाते हैं. मौजूदा जांच तकनीकें इतनी संवेदनशील नहीं हैं कि छिपी कोशिकाओं को समय रहते पकड़ सकें. यही वजह है कि यह सवाल वर्षों से डॉक्टरों को परेशान करता रहा है.
सोई हुई कैंसर कोशिकाएं आखिर होती क्या हैं
इलाज के दौरान ज्यादातर कैंसर कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं. लेकिन कुछ कोशिकाएं खून के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंच जाती हैं. यह कोशिकाएं अक्सर हड्डी के अंदर बिना किसी लक्षण के छिपी रह जाती हैं. डॉक्टर इन्हें डिस्सेमिनेटेड ट्यूमर सेल्स कहते हैं. यह कोशिकाएं सालों तक निष्क्रिय पड़ी रह सकती हैं. फिर अचानक सक्रिय होकर बीमारी को दोबारा जन्म दे सकती हैं.
स्टडी में क्या मिला
शोधकर्ताओं ने पाया कि ट्यूमर में कुछ क्षेत्र ऐसे होते हैं, जहां कोशिकाएं लगातार बंटती रहती हैं. वहीं कुछ हिस्सों में कोशिकाएं पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी रहती हैं. यह जानकारी सितंबर 2026 में एक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुई. यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों को ट्यूमर के भीतर इतना डिटेल्ड सेल्युलर नक्शा मिला है. इस नक्शे से यह भी पता चलता है कि किन मरीजों में दोबारा बीमारी लौटने का खतरा ज्यादा रहता है.
इलाज की दिशा में क्या हो सकता है फायदा
इस खोज के बाद डॉक्टर उन खास कोशिकाओं को टारगेट करने वाली दवाओं पर काम कर सकते हैं जो लंबे समय तक सोई रहती हैं. कुछ क्लिनिकल ट्रायल में पहले से ही ऐसी दवाओं का परीक्षण चल रहा है जो कोशिकाओं की निष्क्रिय अवस्था को तोड़ने में मदद करती हैं. शुरुआती नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं. हालांकि इन दवाओं को आम इलाज में शामिल होने में अभी समय लगेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ सालों में इस दिशा में बड़ी प्रगति हो सकती है.
महिलाओं के लिए इसका क्या मतलब है
जिन महिलाओं का पहले इलाज हो चुका है, उनके लिए यह खबर राहत भरी है. भविष्य में डॉक्टर बेहतर तरीके से यह अंदाजा लगा पाएंगे कि किन मरीजों को ज्यादा निगरानी की जरूरत है. इससे फॉलो-अप जांच और इलाज की योजना दोनों में सुधार हो सकता है. फिलहाल नियमित जांच करवाना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना सबसे जरूरी कदम बना हुआ है. किसी भी नए लक्षण को नजरअंदाज न करें.
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य ज्ञानवर्धन के लिए है, यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है. किसी भी लक्षण या चिंता की स्थिति में योग्य डॉक्टर से जरूर सलाह लें.
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