महिला स्व सहायता समूहों को वितरण में लगाया जाएगा
700 करोड़ के काम में केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेडी टू ईट की केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में हाईजीन पूरक पोषण आहार माह फरवरी से मिलना शुूरू हो जाएगा। बीज निगम के द्वारा इसके संबंध में व्यवस्था सुनिश्चिति की जा रही है। कैबिनेट के निर्णय के बाद महिला समूहों से रेडी टू ईट बनाने का कार्य छाीन लिया गया है। अब यह कार्य मयाीनों के माध्यम से बीज निगम के द्वारा किया जाएगा। बताया जाता है कि पिछले 15 साल से एक ही व्यक्ति के द्वारा यह कार्य किया जा रहा था। करीब 700 करोड़ रुपए के सालाना काम में काफी गड़बड़ी के चलते राज्य शासन ने केंद्रीकृत व्यवस्था शुरू की है।

राज्य में संचालित रेडी-टू-ईट योजना में संलग्न 1620 महिला समूह उत्पादन से पृथक होकर अब होंगे वितरण में सम्मिलित होंगे इससे उनकी आय निरंतर रहेगी। भारत शासन द्वारा जारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं फूड सेफ्टी हाईजिंन निर्देष 2013 में पूरक पोषण आहार निर्माण में स्वच्छता
संबंधी मानक निर्देश दिये गए है। राज्य में कुल 20,000 हजार से अधिक समूह आंगनबाड़ी केन्द्रों में गरम भोजन एवं रेडी-टू-ईट प्रदाय करने का काम कर रहें है। उल्लेखनीय है कि इनमें राज्य में 1750 सेक्टरों में 18,000 समूहों द्वारा गरम भोजन हेतु सुखा राशन का प्रदाय किया जा रहा है। यह व्यवस्था यथावत रहेंगी। 1620 महिला स्व सहायता समूह द्वारा रेडी-टू-ईट प्रदाय किया जाता है। इसको समाप्त किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन


उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशानुसार हितग्राहियों को प्रदायित पूरक पोषण आहार कार्यक्रम अंतर्गत वितरित रेडी टू ईट निर्धारित माइकोन्यूट्रीएंट्स युक्त, फोर्टिफाईड एवं फाइन मिक्स होना चाहिए। साथ ही रेडी टू ईट मानव स्पर्षरहित, स्वचलित मशीन द्वारा निर्मित एवं जीरो संक्रमण रहित होना चाहिए। जिले में संचालित बाल विकास परियोजनाओं के 1 सेक्टर में 1 महिला स्व सहायता समूह द्वारा रेडी-टू-ईट का निर्माण किया जाकर सेक्टर के औसतन 25 आंगनबाड़ी केन्द्रों के हितग्राहियों को रेडी टू ईट का वितरण किया जाता रहा है। वर्तमान में राज्य में 1750 सेक्टरों में 1620 महिला स्व सहायता समूह के द्वारा रेडी टू ईट का प्रदाय किया जा रहा है।

रायगढ़ में लगेगी मशीन

मंत्री परिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के संयुक्त उपक्रम रायगढ़ संयंत्र द्वारा रेडी टू ईट प्रदाय किये जाने का निर्णय लिया गया है। केन्दीयकृत व्यवस्था लागू होने से खाद्य सामग्री की वैधता अवधि अधिक एवं गुणवत्ता में एकरूपता व शासन का पूर्णत: नियंत्रण होगा। 1620 महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से अब मात्र परिवहन एवं वितरण का कार्य परियोजना से आंगनबाड़ी केन्द्रों तक संपादित किया जायेगा।

महिला मूहों को 15 रुपए भुगतान

पूर्व में भारत सरकार द्वारा रेडी टू ईट हेतु 50 रुपए प्रति किलो ग्राम दिया जा रहा था। जिसमें राशि रूपये 13.50 रुपए प्रति किलो ग्राम महिला स्व सहायता समूहों को दिया जा रहा था। अब घर-घर वितरण कार्य हेतु महिला समूहों को रूपये 15 रुपए प्रति किलो दिया जायेगा। प्रदेश में कियाशील लगभग 1.90 हजार महिला स्व सहायता समूह में से रेडी टू ईट प्रदाय कर रहें 1620 समूह कुल का मात्र 1 प्रतिशत है।

जीपीएस सिस्टम से मानिटरिंग

जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम के माध्यम से सामग्री की आपूर्ति एवं पैकेजिंग में क्यूआर कोड का उल्लेख होगा। वर्तमान में अनुबंधित महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी टू ईट के परिवहन एवं वितरण कार्य में सहयोग लिया जावेगा, जिससे उनके आय के साधन में निरंतरता रहेगी।

इन राज्यों में केंद्रीकृत व्यवस्था

केन्द्रीयकृत व्यवस्था के तहत् गुजरात राज्य में गुजरात कॉर्पोरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के 03 जिला सहकारी दूग्ध उत्पादक संस्थाओं द्वारा, तेलंगाना व आंध्रप्रदेश राज्य में तेलंगाना फूड्स द्वारा तथा मध्यप्रदेश
राज्य में एमपी एग्रो फूड कार्पोरेशन द्वारा स्वचलित मशीनों से निर्मित फोर्टिफाईड एवं माइकोन्यूट्रीएंट्स युक्त पोषण आहार प्रदाय किया जा रहा है।