रोज़ मूंगफली और दिमाग स्टडी के लिए कटोरी में बिना नमक की भुनी मूंगफली और दिमाग का मूल इलस्ट्रेशन

सर्दियों की दस्तक के साथ घरों में भुनी मूंगफली फिर दिखने लगी है. इसी बीच रोज़ मूंगफली और दिमाग पर नीदरलैंड की एक नई स्टडी चर्चा में है. दरअसल इसमें 60 से 75 साल के 31 स्वस्थ लोगों ने 16 हफ्ते तक रोज़ 60 ग्राम मूंगफली खाई. नतीजों में याददाश्त से जुड़े दिमागी हिस्सों में इंसुलिन का असर बेहतर दिखा.

क्या रोज़ मूंगफली खाने से बुज़ुर्गों का दिमाग तेज़ होता है

इस स्टडी से इतना बड़ा दावा नहीं बनता. दरअसल इसमें सिर्फ यह मापा गया कि दिमाग के कुछ हिस्से इंसुलिन पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं. फिर मूंगफली वाले दौर में यह प्रतिक्रिया बेहतर दिखी. लेकिन ट्रायल छोटा था और भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया पर असर जांचा ही नहीं गया. इसलिए इसे शुरुआती संकेत मानें.

मूंगफली वाली इस स्टडी की अहम जानकारी

  • कहां हुई: नीदरलैंड के मास्ट्रिख्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में.
  • कहां छपी: फूड एंड फंक्शन जर्नल में, 30 सितंबर 2026 को ऑनलाइन.
  • किन पर: 60 से 75 साल के 31 स्वस्थ लोग.
  • कितनी मूंगफली: रोज़ 60 ग्राम, बिना नमक की, छिलके समेत भुनी हुई.
  • फंडिंग: पीनट इंस्टीट्यूट फाउंडेशन, यानी मूंगफली उद्योग से जुड़ी संस्था.

ट्रायल में असल में क्या किया गया

यह “क्रॉसओवर” ट्रायल था. यानी हर व्यक्ति ने दोनों हालात खुद जिए. पहले दौर में 16 हफ्ते तक रोज़ मूंगफली खाई. वहीं दूसरे दौर में 16 हफ्ते तक मूंगफली से पूरी तरह दूरी रखी. फिर दोनों दौर के नतीजों की तुलना हुई.

इस दौरान दिमाग की जांच MRI मशीन से की गई. रोज़ मूंगफली और दिमाग के रिश्ते को परखने के लिए यही मुख्य तरीका था. इसमें खास तकनीक से दिमाग में खून का बहाव मापा गया. इसके बाद लोगों को नाक से इंसुलिन दिया गया. फिर देखा गया कि इंसुलिन के बाद किन हिस्सों में खून का बहाव कितना बदला.

दरअसल इंसुलिन सिर्फ ब्लड शुगर का हार्मोन नहीं है. दिमाग में भी यह याददाश्त और ऊर्जा के काम से जुड़ा माना जाता है. हालांकि उम्र बढ़ने पर दिमाग की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता घट सकती है.

रोज़ मूंगफली और दिमाग पर नतीजे क्या कहते हैं

मूंगफली वाले दौर में दिमाग के दाएं हिस्से के कुछ इलाकों में इंसुलिन का असर बेहतर मिला. खास बात यह है कि इनमें हिप्पोकैंपस भी शामिल है. यह हिस्सा नई बातें याद रखने में अहम भूमिका निभाता है.

इसके अलावा इसी टीम की 2025 की एक स्टडी भी है. उसमें इसी तरह मूंगफली खाने पर दिमाग में कुल खून का बहाव 3.6% बढ़ा था. साथ ही शब्द याद रखने की क्षमता में 5.8% सुधार दिखा था. शोधकर्ताओं का अंदाज़ा है कि मूंगफली के अच्छे फैट, फाइबर, विटामिन और एल-आर्जिनिन जैसे तत्व मिलकर काम करते होंगे. हालांकि किसी एक तत्व को कारण साबित नहीं किया गया.

स्टडी पढ़ते समय ये सीमाएं याद रखें

सबसे पहले सैंपल बहुत छोटा है. सिर्फ 31 लोग किसी नतीजे को पूरी आबादी पर लागू करने के लिए काफी नहीं होते. दूसरी तरफ, सभी लोग स्वस्थ थे. डायबिटीज़ या याददाश्त की बीमारी वाले लोगों पर क्या होगा, यह नहीं पता.

तीसरी बात फंडिंग की है. दरअसल स्टडी का पैसा मूंगफली उद्योग से जुड़े फाउंडेशन ने दिया. शोधकर्ताओं के मुताबिक फंड देने वाली संस्था का डिज़ाइन, विश्लेषण या लेखन में कोई दखल नहीं था. फिर भी पाठक के तौर पर यह जानकारी अहम है. साथ ही प्रेस रिलीज़ भी इसी संस्था ने जारी की.

आखिर में, यह दिमाग की एक जैविक प्रतिक्रिया का माप है. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मूंगफली डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर से बचाती है.

घर में मूंगफली खाने का समझदार तरीका

अगर आप रोज़ मूंगफली और दिमाग वाले नतीजे से प्रेरित होकर इसे डाइट में जोड़ना चाहते हैं, तो कुछ बातें ध्यान रखें.

  • मात्रा पर नज़र रखें. ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) की 2024 की गाइडलाइन रोज़ करीब 30 ग्राम मेवे और बीज खाने की सलाह देती है.
  • स्टडी वाली 60 ग्राम मूंगफली में करीब 340 कैलोरी होती है. वज़न पर नज़र रखने वाले इसे बाकी खाने में से घटाएं.
  • बिना नमक की, सूखी भुनी मूंगफली चुनें. तली हुई या मसालेदार नमकीन मूंगफली में नमक और तेल ज़्यादा होता है.
  • मूंगफली से एलर्जी हो, तो इसे बिल्कुल न खाएं. खुजली, होंठ सूजना या सांस में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.
  • सीलन वाली या फफूंद लगी मूंगफली फेंक दें.
  • बुज़ुर्गों के दांत कमज़ोर हों, तो दरदरी पिसी मूंगफली या चटनी बेहतर विकल्प है.

वहीं दिमाग की सेहत के लिए कोई एक चीज़ काफी नहीं होती. रोज़ चलना, अच्छी नींद, ब्लड प्रेशर और शुगर पर नियंत्रण और लोगों से मिलते-जुलते रहना भी ज़रूरी है.

रोज़ मूंगफली और दिमाग पर यह स्टडी दिलचस्प शुरुआत है. लेकिन बड़े और लंबे ट्रायल आने तक इसे पक्का इलाज या बचाव न मानें.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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