रेडी टू ईट की गुणवत्ता को बनाए रखने लिए गया निर्णय

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि राज्य में चल रही रेडी टू ईट योजना से महिला स्व सहायता समूहों को पूरी तरह से बाहर नहीं किया गया है। वह इसका निर्माण कार्य नहीं करेंगी, पर फूड का परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी उनके ही पास रहेगी। अब केवल इसे बनाने का जिम्मा राज्य सरकार ने राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को सौंप दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि पोषण आहार की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट बैठक में रेडी-टू-ईट योजना के केन्द्रीकरण का फैसला लिया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। खबर सामने आते ही सबसे पहले कवर्धा में प्रदर्शन शुरू हो गया। स्व सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। इसके बाद महिलाएं मंत्री मोहम्मद अकबर से मिलने के लिए रायपुर पहुंची और वहां पर उनसे मुलाकात कर अपनी मांगे रखीं। ज्ञात हो कि इससे पहले इस बात की जानकारी आ रही थी कि राज्य में इसका काम कर रही 20 हजार से अधिक स्व सहायता समूहों को इससे अलग कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इसके निर्माण के बाद इसके वितरण का कार्य उनके द्वारा ही कराया जाएगा।

आदेश की कॉपी

हंगामे के बाद महिला बाल विकास ने दी जानकारी

हंगामा बढऩे पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसे लेकर जानकारी साझा की। बताया गया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए रेडी-टू-ईट पोषण आहार का वितरण किया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और फूड सेफ्टी हाइजीन निर्देश 2013 में पूरक पोषण आहार निर्माण में स्वच्छता संबंधी मानक निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केंद्रीयकरण किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश

विभाग की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने हितग्राहियों को दिए जा रहे रेडी टू ईट में निर्धारित ऊर्जा, माइक्रो न्यूट्रीएंट्स (कैलोरी, प्रोटीन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, नाइसीन, कैल्शियम, थायमिन, आयरन, विटामिन ए, बी12, सी एवं डी) होने की बात कही है। साथ ही वह फोर्टिफाइड एवं फाइन मिक्स होना चाहिए। वहीं मानव स्पर्श रहित, स्वचलित मशीन से निर्मित और जीरो संक्रमण वाला होना चाहिए। इससे गुणवत्ता बेहतर रहेगी।