केंद्र पर भड़के सीएम, केंद्र और जांच आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल

रायपुर। झीरम घाटी कांड में न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आ जाने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार झीरम घाटी के षड्यंत्र में किसे बचाना चाहती है। आखिर हमें जांच करने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने एनआईए और न्यायिक जांच पर भी सवाल उठाए।

मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि न्यायिक आयोग घटना स्थल पर जाकर जांच नहीं कर करती। ये काम जांच एजेंसियां करती हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी थी। हमने चुनावी घोषणापत्र में झीरम कांड की जांच कराने का वादा किया था। हम सरकार में आए तो एसआईटी का गठन भी किया। केंद्र सरकार से केस डायरी वापस मांगी। तत्कालीन राज्य सरकार ने ही उसे एनआईए को दिया था और एनआईए जांच पूरी कर चुकी थी। कई बार पत्राचार के बाद भी, गृहमंत्री के साथ कई बैठकों के बाद भी केंद्र सरकार ने केस की फाइल वापस नहीं की। हमें तो न्याय चाहिए। आप जांच नहीं कर सकते तो हमें जांच करने दीजिए।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों से कुछ पूछा ही नहीं गया

सीएम ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार आखिर किसको बचाना चाहती है? किस तथ्य को छिपाना चाहती है? सवाल इस बात का है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि घटना स्थल पर मौजूद अधिकांश लोगों से कुछ पूछा ही नहीं गया। इसमें राज्यसभा सांसद और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम जैसे कई लोग हैं। सीएम ने कहा कि खुद एनआईए ने कोर्ट में कहा था, सरेंडर के बाद आंध्र प्रदेश की जेल में बंद नक्सली नेता गुडसा उसेंडी का बयान लिया जाना चाहिए। उसके बाद भी ऐजेंसी ने आज तक गुडसा उसेंडी से पूछताछ क्यों नहीं की?

षड़यंत्र के एंगल से जांच ही नहीं हुई

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले में षड्यंत्र के एंगल से जांच क्यों नहीं की। उससे पहले भी कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन का अपहरण हुआ। बाद में भी कई लोगों का नक्सलियों ने अपहरण किया। सरकार ने बातचीत की। उस समय क्या बातचीत हुई यह तो नहीं पता लेकिन बंधकों को छोड़ा गया। इस सबके होते हुए जब नंद कुमार पटेल और दिनेश पटेल को नक्सली पकड़कर ले गए थे तो फिर उन्हें गोली क्यों मार दी गई। झीरम मामले में षड्यंत्र हुआ था। भाजपा, तत्कालीन राज्य सरकार और अभी केंद्र सरकार यह जानती है कि षड्यंत्र किसने किया था। ये लोग उसको बचा रहे हैं।

न्यायिक जांच अधूरी थी तो अचानक सौंप कैसे दी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की न्यायिक जांच आयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, घटना के बाद 28 मई 2013 को तीन महीने के लिए बने आयोग का कार्यकाल 20 बार बढ़ाया गया। जून 2021 में हमने उनका कार्यकाल बढ़ाकर अंतिम अवसर दिया था। सितंबर में उनके सचिव का पत्र आया कि जांच अभी अधूरी है। वे समय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इस बीच न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा का स्थानांतरण हो गया। हमने विधि विभाग से अभिमत मांगा था कि अब हमारे पास आयोग की जांच पूरी करने का क्या विकल्प है। अभी अभिमत नहीं मिला था, अचानक मीडिया के जरिए पता लगा कि रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी गई है। राजभवन से भी उनके पास इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।